प्रॉपर्टी लोन इंटरेस्ट रेट: प्राॅपर्टी लोन (Loan Against Property) के लिए ब्याज दर बहुत महत्वपूर्ण होती है क्योंकि प्राॅपर्टी लोन की रकम व अवधि ज्यादा होती है जिसके कारण ब्याज की रकम भी काफी ज्यादा हो जाती है। इसलिए प्राॅपर्टी लोन लेते समय ब्याज दर का काफी ध्यान रखना चाहिए।
देखा जाए तो प्राॅपर्टी लोन की ब्याज दर में 0.01% का फर्क भी किया जाए तो ब्याज की रकम में काफी अंतर हो जाता है। इसलिए प्राॅपर्टी लोन लेते समय कोशिश करें कि कम से कम ब्याज दर पर लोन मिले।

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प्राॅपर्टी लोन इंटरेस्ट रेट

प्राॅपर्टी लोन की ब्याज दर बैंक पर निर्भर होती है मगर बहुत से ऐसे कारक भी होते हैं जो प्राॅपर्टी लोन इंटरेस्ट रेट को प्रभावित करते हैं। या कहें कि प्राॅपर्टी लोन की ब्याज बहुत से कारकों से कम या ज्यादा भी हो सकती है। इन सभी कारकों को आप इसी पोस्ट मे जान पाएंगे और इन सभी को ध्यान में रखते हुए कम ब्याज दर पर प्राॅपर्टी लोन लें पाएंगे।
साथ ही कुछ बैंकों व एनबीएफसी की प्राॅपर्टी लोन के लिए ब्याज दरों के बारे में भी जानेंगे।

प्राॅपर्टी लोन क्या हैं

वित्तीय जरूरतों को पूरा करने के लिए प्राॅपर्टी (संपत्ति) को बैंक के पास गिरवी रखकर लिये गये लोन को प्राॅपर्टी लोन (लोन अगेंस्ट प्रॉपर्टी) या माॅर्गेज लोन कहतें है।
प्राॅपर्टी लोन सिक्योर्ड लोन होता है जिसके कारण इसकी ब्याज दर अन्य लोन की तुलना में कम होती है।

प्राॅपर्टी लोन इंटरेस्ट रेट

प्राॅपर्टी लोन के लिए हर बैंक की अपनी अलग अलग ब्याज दरें हैं जो 8 प्रतिशत से 25 प्रतिशत के बीच हो सकती है। बैंकों की तुलना में एनबीएफसी व प्राइवेट बैंकों की ब्याज दरें ज्यादा होती है।
वही लोन मिलने की संभावना एनबीएफसी व प्राइवेट बैंकों में ज्यादा रहती है।

प्राॅपर्टी लोन विभिन्न बैंकों की ब्याज दर Property loan Interest Rate

बैंक/एनबीएफसीइंटरेस्ट रेट वार्षिक
पंजाब नेशनल बैंक8.87%-12%
आईसीआईसीआई बैंक8.35%-10%
टाटा केपिटल10.10% से शुरू
स्टेट बैंक ऑफ इंडिया8.45%-10%
आईडीएफसी बैंक8.0% से शुरू
एचडीएफसी बैंक8.0%-8.95%
बैंक ऑफ बड़ौदा8.20% से शुरू
एक्सिस बैंक11.25 से शुरू
कोटक महिंद्रा बैंक9.5% से शुरू
IIFL11.50%-25%
प्राॅपर्टी लोन इंटरेस्ट रेट

बैंकों की ब्याज समय के साथ बदल भी सकती हैं। लोन लेने से पहले बैंक से वर्तमान ब्याज दर के बारे में जरूर जान लेना चाहिए।

प्राॅपर्टी लोन इंटरेस्ट रेट प्रभावित करने वाले कारक

लोन अवधि (Loan Tenure)

लोन की अवधि ब्याज दर को प्रभावित करती है। लोन की अवधि लोन की रकम के अनुसार छोटी व लंबी हो सकती हैं। लंबी अवधि के लिए लोन लेने पर ब्याज दर अधिक हो सकती है। जब छोटी अवधि के लोन पर ब्याज कम होती है।

सिबिल स्कोर (Cibil Score)

अच्छा सिबिल स्कोर / क्रेडिट स्कोर होना हर तरह के लोन के लिए महत्वपूर्ण होता है। कम सिबिल स्कोर होने पर ब्याज दर अधिक होती है इसके साथ ही कम रकम का लोन ही मंजूर हो पाता है। जबकि अच्छा सिबिल स्कोर (750 से ऊपर) होने पर लोन की ब्याज दर कम रहती है। और लोन के अप्रूवल मे भी आसानी हो जाती है।

इसे भी पढ़ें- कम सिबिल स्कोर होने पर कैसे लोन लें

प्राॅपर्टी का प्रकार (Type of Property)

प्राॅपर्टी लोन के लिए प्राॅपर्टी का प्रकार बहुत महत्वपूर्ण होता है।
काॅमर्शियल प्राॅपर्टी या इंडस्ट्रीयल प्राॅपर्टी पर लोन लेने पर ब्याज दर अधिक होती है। जबकि
रेजिडेंशियल प्रॉपर्टी पर लोन लेने पर ब्याज दर कम रहती है।
लोन के लिए कई तरह की प्राॅपर्टी बंधक (Mortgage) की जा सकती हैं-
रेजिडेंशियल प्रॉपर्टी
काॅमर्शियल प्राॅपर्टी
इंडस्ट्रियल प्राॅपर्टी
किराए का मकान
खाली प्लाट
आफिस आदि।

लोन टू वैल्यू रेश्यो (LTV)

प्राॅपर्टी लोन मे LTV बहुत महत्वपूर्ण होता है। इससे लोन की रकम तय होती है साथ ही यह ब्याज दर के लिहाज से बहुत जरूरी होता है। अधिक LTV होने पर ब्याज दर भी अधिक होती है। जबकि कम लोन टू वैल्यू रेश्यो होने पर कम ब्याज दर रहती है।

ऊधारकर्ता की इनकम (Income)

आवेदक की इनकम लोन की ब्याज दर मे बहुत महत्वपूर्ण होती है। इनकम ज्यादा या स्थिर इनकम होने पर लोन की ब्याज दर कम हो सकती हैं। बैंक लोन की रिपेमेंट में कम जोखिम होने पर कम ब्याज दर पर लोन मुहैया करा देता है जबकि लोन की रिपेमेंट में जोखिम ज्यादा होने पर लोन की ब्याज दर अधिक तय की जाती है।

क्रेडिट हिस्ट्री

यदि आपने पहले भी कई लोन लिये है जिन्हें आपने सही ढंग से चुकाया है तो आपकी क्रेडिट हिस्ट्री अच्छी होती है। या कहें कि आपको लोन की रिपेमेंट करने का अच्छा खासा अनुभव है और माना जा सकता है कि आप लोन की रिपेमेंट मे किसी तरह की कोई चूक नही करेंगे। ऐसी स्थिति में आपके लिए लोन की ब्याज दर कम रखी जा सकती हैं।

सह आवेदक Co-borrowers

अकेले व्यक्ति के लिए लोन की रिपेमेंट करना मुश्किल हो सकता है जबकि दो या तीन व्यक्तियों के लिए लोन की रिपेमेंट करना आसान होता है इसीलिए बैंक को एक व्यक्ति की तुलना मे दो या तीन व्यक्तियों को लोन देने मे कम जोखिम होता है जिसके कारण प्राॅपर्टी लोन मे सह-आवेदक होने पर प्राॅपर्टी लोन इंटरेस्ट रेट कम हो सकती हैं।

रिपेमेंट क्षमता (Repayment Capacity)

ऊधारकर्ता की रिपेमेंट क्षमता भी लोन के ब्याज दर को प्रभावित कर सकती हैं। ऊधारकर्ता की रिपेमेंट क्षमता इनकम व खर्चों के हिसाब से तय होती है। अधिक खर्च या अन्य लोन की ईएमआई होने पर रिपेमेंट क्षमता कम होती है जिसके कारण ब्याज दर अधिक हो सकती है।

प्राॅपर्टी की लोकेशन

प्राॅपर्टी की लोकेशन भी लोन की ब्याज दर को कम या ज्यादा कर सकती हैं। शहरी इलाके या उच्च कीमत वाली लोकेशन पर प्राॅपर्टी होने पर लोन की ब्याज दर कम हो सकती है जबकि ग्रामीण या निम्न कीमत वाली प्राॅपर्टी पर लोन लेने के लिए ब्याज दर अधिक होती है।

बैंक / एनबीएफसी

यह साफ तौर पर देखा जा सकता है कि बैंकों के मुकाबले एनबीएफसी की ब्याज दर अधिक होती है। प्राॅपर्टी लोन के लिए भी ऐसा ही हैं। यदि आप बैंक से लोन लेते हैं तो आपको कम ब्याज दर पर लोन मिलने की संभावना रहती है। जबकि एनबीएफसी से लोन लेने पर तुलनात्मक अधिक ब्याज दर लागू होती हैं। वही सरकारी बैंकों की ब्याज दर प्राइवेट बैंकों की तुलना मे कम होती है। ब्याज दर मे कम या ज्यादा होने का कारण बैंकों के फिचर्स व लोन मे सहुलियत प्रदान करना हो सकता है।

प्राॅपर्टी लोन के फायदे व विशेषताएं

कम ब्याज दर: प्राॅपर्टी लोन की ब्याज दर अन्य लोन के मुकाबले कम होती है। होम लोन के बाद प्राॅपर्टी लोन की ब्याज दर 8 प्रतिशत से शुरू होती है जबकि अन्य लोन की ब्याज दर इससे अधिक ही होती है।

लंबी रिपेमेंट अवधि: प्राॅपर्टी लोन की अवधि 15 साल तक हो सकती है जबकि कुछ बैंक इससे भी लंबी अवधि के लिए प्राॅपर्टी लोन मुहैया करते हैं। लोन की अवधि लोन की रिपेमेंट के लिए भी बहुत महत्वपूर्ण होती है। लंबी अवधि के लोन को चुकाना सरल होता है।

ज्यादा रकम: संपत्ति के बदले लोन (Loan Against Property) पर बैंक को लोन की रिपेमेंट मे कम जोखिम रहता है जिसके कारण बैंक लोन की रकम भी अधिक देता है। प्राॅपर्टी लोन की रकम प्राॅपर्टी की वैल्यू का 60 से 80 प्रतिशत तक हो सकती है। वही लोन की अधिकतम रकम पात्रता के अनुसार 25 करोड़ भी हो सकती है।

आसान लोन प्रक्रिया: संपत्ति के बदले लोन (Property Loan) सिक्योर्ड लोन होता है। जिसके कारण लोन मिलना आसान होता है। हालांकि बैंक संपत्ति व ऊधारकर्ता की पात्रता पूर्ण रूप से जांच करने के बाद ही लोन मंजूर करता है। पात्रता के अनुसार लोन मिलना आसान होता है।

लोन का उद्देश्य: प्राॅपर्टी लोन लेने का उद्देश्य व्यक्तिगत या व्यवसायिक तौर पर हो सकता है। प्राॅपर्टी लोन का उपयोग निम्न कार्य के लिए किया जा सकता है-
बिजनेस के लिए
व्यक्तिगत जरूरतों के लिए
बच्चों की शिक्षा के लिए
बच्चों की शादी के लिए
मेडिकल इमरजेंसी के खर्चों के लिए।

लोन के बाद प्राॅपर्टी का इस्तेमाल: संपत्ति के बदले लोन लेने के बाद भी ऊधारकर्ता संपत्ति का पहले की तरह ही इस्तेमाल कर सकता है। संपत्ति को बैंक बंधक बनाता है फिर भी मालिकाना हक ऊधारकर्ता का ही रहता है।

प्री-क्लोजर विकल्प: यदि ऊधारकर्ता प्राॅपर्टी लोन की रिपेमेंट समय से पहले करना चाहता है तो इसके लिए भी विकल्प मौजूद होता है। कई तरह के लोन को समय से पहले पूर्ण भुगतान करने पर फीस देनी पड़ती है। जबकि प्राॅपर्टी लोन की प्री-क्लोजर पर फीस में छूट मिलती है। हालांकि कुछ ही स्थिति में प्रीक्लोजर फीस मे छूट का प्रावधान होता है।

Top Up विकल्प: कभी कभी लोन लेने के बाद भी अधिक रकम की आवश्यकता पड़ जाती हैं। ऐसे मे बिना किसी प्रक्रिया के लोन मिलना मुश्किल होता हैं। प्राॅपर्टी लोन के तहत कुछ बैंक Top Up की सुविधा भी देते हैं। हालांकि Top Up के लिए भी कुछ पात्रता मापदंड होते हैं जिन्हें पूरा करने के बाद ही टाॅप अप लिया जा सकता है।

Moratorium Period: वित्तीय संकट के कारण लोन की ईएमआई के भुगतान करने मे मुश्किलें आने पर कुछ बैंक Moratorium Period की सुविधा भी देते हैं। जो दो से तीन महीने का समय हो सकता हैं। जिसमें ईएमआई भरने की आवश्यकता नहीं होती है। मोराटोरियम विकल्प का इस्तेमाल करने पर लोन की अवधि दो से तीन महीने बढ़ जाती हैं। हालांकि हर बैंक मोराटोरियम विकल्प नहीं देता हैं। मोराटोरियम वह अवधि होती हैं जिसमें ईएमआई ना चुकाने पर कोई फीस या पेनल्टी नहीं लगाई जाती है।

लोन ना चुका पाने की स्थिति में बैंक गिरवी रखी गई प्राॅपर्टी की नीलामी करके लोन की भरपाई करता है। जिससे ऊधारकर्ता को प्राॅपर्टी का उचित मूल्य नहीं मिलता है। मगर प्राॅपर्टी लोन में ऊधारकर्ता गिरवी रखी गई प्राॅपर्टी को खुद बेचकर लोन का भुगतान कर सकता हैं।

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