मकान की रजिस्ट्री पर लोन कैसे मिलेगा

मकान की रजिस्ट्री पर लोन कैसे मिलेगा: ब्याज दर, योग्यता, जरूरी दस्तावेज

मकान की रजिस्ट्री पर लोन कैसे लें: अचानक पैसों की जरूरत आने पर बहुत से लोग पर्सनल लोन लेने के बारे में सोचते हैं, लेकिन यदि आपके नाम पर मकान है तो उसकी रजिस्ट्री के आधार पर लोन लेना कई मामलों में बेहतर विकल्प साबित हो सकता है। इस तरह के लोन में ब्याज दर आमतौर पर पर्सनल लोन से कम होती है और बड़ी राशि मिलने की संभावना भी रहती है। हालांकि लोन लेने से पहले ब्याज दर, पात्रता, दस्तावेज, लोन राशि, नियम व शर्तों के साथ-साथ मासिक ईएमआई का अनुमान लगाना भी जरूरी है। इस लेख में आपको मकान की रजिस्ट्री पर लोन से जुड़ी लगभग हर महत्वपूर्ण जानकारी सरल भाषा में मिलेगी, जिससे सही निर्णय लेने में आसानी होगी।

मकान की रजिस्ट्री पर लोन क्या होता है?

मकान की रजिस्ट्री पर लोन वह ऋण होता है जिसमें आपकी संपत्ति (मकान) को बैंक या वित्तीय संस्थान के पास सुरक्षा (गिरवी) के रूप में रखा जाता है। इसके आधार पर बैंक आपकी पात्रता और मकान की बाजार कीमत के अनुसार लोन मंजूर करता है। इस प्रकार के लोन को मुख्य रूप से दो श्रेणियों में समझा जा सकता है।

पहला होम लोन होता है, जिसका उपयोग केवल आवास संबंधी कार्यों के लिए किया जाता है। जैसे नया घर बनवाना, पहले से बने मकान की मरम्मत करवाना, अतिरिक्त कमरे या मंजिल का निर्माण करना अथवा घर का विस्तार करना। इस लोन की राशि का उपयोग केवल आवासीय उद्देश्य के लिए ही किया जा सकता है।

दूसरा लोन अगेंस्ट प्रॉपर्टी (Loan Against Property) या मॉर्गेज लोन होता है। इसमें मकान की रजिस्ट्री के आधार पर लोन लेकर आप अपनी विभिन्न वित्तीय जरूरतों को पूरा कर सकते हैं। उदाहरण के लिए बच्चों की पढ़ाई, शादी, व्यवसाय का विस्तार, मेडिकल इमरजेंसी, पुराने कर्ज का भुगतान या अन्य व्यक्तिगत एवं व्यावसायिक आवश्यकताओं के लिए इस लोन का उपयोग किया जा सकता है। अब आगे मकान की रजिस्ट्री पर मिलने वाले लोन अगेंस्ट प्रॉपर्टी के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई है, क्योंकि यह होम लोन की तुलना में अधिक उद्देश्यों के लिए उपयोग किया जा सकता है।
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मकान की रजिस्ट्री पर लोन कैसे मिलेगा?

मकान की रजिस्ट्री पर लोन लेने के लिए आपको लोन की पात्रता मानदंड, आवश्यक दस्तावेज, नियम व शर्ते आदि को पूरा करना जरूरी होता हैं।
इसके बाद आप अपनी पसंद के बैंक या एनबीएफसी से मकान की रजिस्ट्री पर लोन ले सकते हैं।

  • सबसे पहले आपको प्राॅपर्टी लोन के लिए आवेदन भरना है। जिसे बैंक शाखा मे जमा करना हैं।
  • बैंक प्रतिनिधि आपके आवेदन फार्म की जांच करता है।
  • आपसे सभी जरूरी दस्तावेज व पात्रता के लिए जानकारी मांगी जाती है।
  • आपके मकान के सभी मान्य दस्तावेज बैंक द्वारा जांचें जाते हैं।
  • किसी भी वाद विवाद के लिए बैंक मकान की कानूनी जांच भी कराता है।
  • मकान की वैल्यू तय करने के लिए बैंक एक टीम का गठन करता है।
  • मकान की तय वैल्यू के अनुसार ही लोन की अधिकतम रकम तय होती है।
  • सबकुछ सही होने पर आपकी पात्रता व मकान की वैल्यू के अनुसार लोन दे दिया जाता हैं। जिसके एवज में बैंक मकान के कागजात (रजिस्ट्री) को अपने पास गिरवी रखता है।
  • इस प्रक्रिया में लगभग 15 दिन या इससे ज्यादा का समय भी लग सकता हैं।

मकान की रजिस्ट्री पर लोन की ब्याज दर कितनी होती हैं?

मकान की रजिस्ट्री पर लोन या प्राॅपर्टी लोन लेने पर बैंक होम लोन की तुलना में 1 या 2 प्रतिशत अधिक ब्याज दर रखते हैं। इस तरह मकान की रजिस्ट्री पर लोन की वार्षिक ब्याज दर 8 से 12 प्रतिशत हो सकती हैं। लोन की ब्याज दर कई कारणों से कम या ज्यादा भी हो सकती हैं जैसे-

  • मकान की लोकेशन
  • मकान की वैल्यू
  • आवेदनकर्ता की इनकम
  • महिला आवेदक या सह-आवेदक होने पर
  • रिपेमेंट क्षमता
  • मकान का प्रकार (रिहायशी, कामर्शियल, आफिस)

सरकारी बैंकों की ब्याज दर एनबीएफसी व प्राइवेट बैंकों की तुलना में कम होती है। मगर प्राइवेट बैंक व एनबीएफसी से लोन मिलने की संभावना अधिक होती है।

प्रोसेसिंग फीस कितनी होती है?

प्रोसेसिंग फीस लगभग हर तरह के लोन पर वसूली जाती है। यह बैंक पर निर्भर करता है कि वह लोन की प्रोसेसिंग फीस कितनी वसूलता है। सामान्य तौर पर प्राॅपर्टी लोन की प्रोसेसिंग फीस लोन की रकम का 0.25% से 2% तक होती है। इसके अतिरिक्त प्रोसेसिंग फीस की रकम पर जीएसटी भी लागू होती है। हालांकि कभी कभी बैंक ऑफर के तहत प्रोसेसिंग फीस पर छूट भी देते हैं।

मकान पर लोन के लिए पात्रता

मकान की रजिस्ट्री पर लोन लेने के लिए बैंक की तरफ से कुछ पात्रता मानदंड होते हैं जिन्हें पूरा करने के बाद ही लोन लिया जा सकता है जैसे-

  • ऊधारकर्ता भारतीय होना चाहिए।
  • ऊधारकर्ता का कोई स्थिर इनकम का स्रोत होना चाहिए जैसे- नौकरी या व्यवसाय आदि।
  • ऊधारकर्ता का सिबिल स्कोर अच्छा होना चाहिए।
  • ऊधारकर्ता की क्रेडिट हिस्ट्री अच्छी होनी चाहिए।
  • ऊधारकर्ता की उम्र 21 से 60 साल के बीच होनी चाहिए।
  • यदि मकान के मालिक एक से अधिक हैं तो लोन आवेदन मे सभी सह-आवेदक होने चाहिए।

बैंक द्वारा पात्रता मानदंड को समय समय पर या ऊधारकर्ता के अनुसार बदला भी जा सकता हैं। इसके लिए बैंक से पहले ही जानकारी लेनी चाहिए।

मकान पर लोन लेने के लिए क्या-क्या डॉक्यूमेंट चाहिए

  • पूरी तरह से भरा हुआ आवेदन फार्म।
  • पहचान व निवास का प्रमाण जैसे- आधार कार्ड, पेनकार्ड, ड्राइविंग लाइसेंस, पासपोर्ट, बिजली बिल आदि।
  • आय का प्रमाण जैसे- सैलरी स्लिप, आयकर रिटर्न, नवीनतम फार्म 16 या पिछले 6 महीने की बैंक अकाउंट स्टेटमेंट आदि।
  • मकान की रजिस्ट्री व अन्य कागजात
  • पासपोर्ट साइज फोटो

वेतनभोगी, स्व-नियोजित व्यक्ति के लिए आवश्यक दस्तावेज अलग अलग हो सकते हैं।

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मकान की रजिस्ट्री पर लोन कैसे मिलेगा
मकान की रजिस्ट्री पर लोन कैसे लें

मकान की रजिस्ट्री पर कितना लोन मिलेगा

बैंक लोन अगेंस्ट प्रॉपर्टी या माॅर्गेज लोन के लिए LTV (लोन टू वैल्यू रेश्यो) के आधार पर रकम निर्धारित करता हैं।
प्राॅपर्टी लोन के तहत मकान की वैल्यू का 60 से 70 प्रतिशत लोन ही मिल सकता है। बैंकों की अधिकतम लोन रकम की सीमा भी होती है जिसके भीतर ही लोन लिया जा सकता है।
मकान की रजिस्ट्री पर लोन की अधिकतम सीमा मकान की वैल्यू के अनुसार 15 से 20 करोड रूपए भी हो सकती है।
लोन की रकम कई बातों पर निर्भर करती है जैसे-

मकान की वैल्यू

मकान की मौजूदा वैल्यू बैंक द्वारा तय की जाती है जिसके अनुसार ही लोन की अधिकतम रकम तय होती है। मकान की वैल्यू (LTV) जितनी अधिक होगी लोन की रकम भी उतनी अधिक हो सकती हैं। मकान की वैल्यू भी कई बातों पर निर्भर होती हैं जैसे- मकान की लोकेशन, मकान का क्षेत्रफल, मकान की उम्र आदि।

मकान की उम्र

मकान की उम्र जितनी कम होगी उसकी वैल्यू उतनी अधिक होगी। अधिक पुराने मकान पर लोन लेने पर वैल्यू कम होती है जिसके कारण कम राशि का लोन ही मिल पाता है। जबकि नये मकान पर अधिक राशि का लोन लिया जा सकता है।

मकान की लोकेशन

मकान शहरी आवासीय सीमा के भीतर होने पर अधिक रकम का लोन मिल जाता हैं जबकि ग्रामीण क्षेत्र मे मकान होने पर मकान की वैल्यू कम होती है जिसके कारण कम राशि का लोन ही मिल पाता है।

आवेदक की इनकम

आवेदक की इनकम लोन की रकम के लिए बहुत महत्वपूर्ण होती है। ज्यादातर बैंक ऊधारकर्ता की इनकम को ध्यान में रखकर ही लोन मंजूर करते हैं। यदि इनकम ज्यादा हैं तो लोन की रकम भी अधिक मिल सकती है। और यदि ऊधारकर्ता की इनकम कम है तो कम रकम का लोन ही मिल पाता है।

आवेदक की रिपेमेंट क्षमता

आवेदक की इनकम व खर्चों को ध्यान में रखकर रिपेमेंट क्षमता का आंकलन किया जाता है। ऊधारकर्ता के खर्चे, अन्य लोन की ईएमआई, दैनिक जीवन के खर्च ज्यादा होने पर रिपेमेंट क्षमता कम होती है। जिसके कारण कम रकम का लोन ही मिल सकता है। और यदि आवेदनकर्ता की रिपेमेंट क्षमता अच्छी होती है तो अधिक राशि का लोन भी मिल सकता है।

सिबिल स्कोर / क्रेडिट स्कोर

आवेदनकर्ता का सिबिल स्कोर / क्रेडिट स्कोर ज्यादा होने पर लोन की रकम भी ज्यादा मिल सकती है। वही सिबिल स्कोर कम होने पर कम रकम का लोन ही मिल पाता है। कई बार कम सिबिल स्कोर के कारण लोन मंजूर होना भी मुश्किल होता हैं।

आवेदकों की संख्या

एक आवेदक की तुलना मे एक से अधिक सह-आवेदक होने पर बैंक को लोन की रिपेमेंट ना होने का जोखिम बहुत कम रहता है। जिसके कारण ज्यादा रकम का लोन भी मंजूर हो जाता है। क्योंकि सभी आवेदकों पर लोन की रिपेमेंट का दायित्व रहता है जिससे अधिक रकम का लोन भी आसानी से चुकाया जा सकता है।

मकान पर कितने समय के लिए लोन मिलता है

मकान की रजिस्ट्री पर लिये गये लोन की रिपेमेंट अवधि 10 से 20 साल तक हो सकती है। कुछ बैंक इससे ज्यादा अवधि के लिए भी लोन मुहैया करते हैं। लोन की अवधि भी कई वजह से कम या ज्यादा हो सकती है जैसे-

  • लोन की रकम
  • आवेदनकर्ता की इनकम
  • आवेदनकर्ता की रिपेमेंट क्षमता
  • मासिक ईएमआई।

मकान की रजिस्ट्री पर लोन लेने से पहले किन बातों का ध्यान रखें?

मकान की रजिस्ट्री पर लोन लेने से पहले केवल ब्याज दर देखकर निर्णय नहीं लेना चाहिए। सबसे पहले यह सुनिश्चित करें कि आपको वास्तव में कितनी राशि की आवश्यकता है और उस राशि की मासिक ईएमआई आपकी आय के अनुसार आसानी से चुकाई जा सकती है या नहीं। इसके अलावा बैंक की प्रोसेसिंग फीस, कानूनी जांच शुल्क, प्रीपेमेंट चार्ज, दस्तावेजों की वैधता और लोन की कुल लागत को भी समझना जरूरी है।

यदि आपकी पहले से कोई ईएमआई चल रही है तो नई ईएमआई जोड़ने से पहले अपनी कुल मासिक देनदारी का आकलन अवश्य करें। इससे भविष्य में भुगतान करने में परेशानी नहीं होगी और लोन डिफॉल्ट होने का जोखिम भी कम रहेगा।

सुझाव: ईएमआई का अनुमान लगाने के लिए आप Fincoloan.com पर उपलब्ध Loan EMI Calculator (लोन ईएमआई कैलकुलेटर) का उपयोग कर सकते हैं। इससे लोन राशि, ब्याज दर और अवधि के अनुसार संभावित मासिक ईएमआई पहले ही पता चल जाती है। साथ ही Debt-to-Income (DTI) Ratio Calculator (डेट-टू-इनकम रेशियो कैलकुलेटर) से आप अपनी ईएमआई चुकाने की क्षमता व संभावित लोन रकम को भी जान सकते है।

मकान की रजिस्ट्री पर लोन की विशेषताएं

मकान की रजिस्ट्री पर लोन या प्राॅपर्टी लोन की बहुत सी विशेषताएं होती है जैसे-

  • मकान पर लोन लेने पर अधिक रकम का लोन मिल जाता हैं मकान की वैल्यू का 70 प्रतिशत तक लोन मिल सकता है।
  • ब्याज दर अन्य लोन की तुलना में कम होती है। होम लोन से 1 या 2 प्रतिशत अधिक होती है।
  • लोन का इस्तेमाल कई कार्यो के लिए किया जा सकता है। जैसे- बच्चों की शादी के खर्च, बच्चों की शिक्षा के लिए ख़र्च, व्यवसाय में वृद्धि के लिए ख़र्च, मेडिकल इमरजेंसी के लिए आदि।
  • लोन की अवधि लंबी होती है जिसके कारण लोन की रिपेमेंट करने मे आसानी होती है।
  • मकान की रजिस्ट्री पर लोन लेने के बाद भी मकान का इस्तेमाल ऊधारकर्ता कर सकता है।
  • मकान मे खुद रहते हैं या किराएदार दोनों स्थिति में लोन मिल जाता हैं।
  • यदि मकान खाली हैं तो भी लोन मिल जाता हैं।
  • लोन की रिपेमेंट ना होने की स्थिति में ऊधारकर्ता अपने मकान को बेचकर लोन का भुगतान कर सकता हैं।
  • टाॅप अप लोन की सुविधा भी मिल सकती है। इसके लिए कुछ नियम व शर्ते होती है। जिनको पूरा करने के बाद टाॅप अप लिया जा सकता है।

नियम व शर्ते क्या क्या होती हैं

मकान पर लोन लेने के लिए बैंक द्वारा बहुत से नियम व शर्ते होती है। जिन्हें जानना बहुत जरूरी होता हैं।

  • अधिकतर बैंकों की रिहायशी मकान पर लोन देना प्राथमिकता होती है। अतः माकान रिहायशी के अलावा किसी व्यवसाय के लिए उपयोग नहीं होना चाहिए।
  • मकान रिहायशी सीमा के भीतर होना चाहिए।
  • मकान संबंधित ऑथर्टी, नगर पालिका आदि से स्वीकृत होना चाहिए।
  • मकान की वैल्यू बैंक द्वारा गठित टीम ही तय करती है।
  • ग्रामीण क्षेत्र की तुलना में शहरी क्षेत्र की सीमा के भीतर मकान होने पर लोन मिलने की संभावना ज्यादा होती है।
  • मकान मे खुद रहते हैं या किराएदार इसका ब्योरा बैंक को देना जरूरी होता हैं।
  • यदि मकान में किराएदार रहते हैं तो किराएदार से भी लोन के लिए NOC लेना जरूरी होता हैं।
  • यदि मकाए के एक से अधिक मालिक हैं तो सभी को सह-आवेदक होना जरूरी है।
  • लोन की अवधि के दौरान मकान के कागजात बैंक के पास गिरवी रखें जाते हैं।
  • लोन लेने के दौरान मकान पर मालिकाना हक उधारकर्ता का ही रहता है।
  • लोन की रिपेमेंट ना होने की स्थिति में ऊधारकर्ता खुद मकान को बेचकर लोन का भुगतान कर सकता हैं।
  • लोन की रिपेमेंट ना होने पर बैंक मकान की नीलामी कर लोन की भरपाई कर सकता है।

इनके अलावा और भी नियम व शर्ते हो सकती हैं। विभिन्न बैंकों की नियम व शर्ते अलग अलग हो सकती है। जिसकी जानकारी लोन लेने से पहले ऊधारकर्ता को होनी चाहिए।

क्या मकान की रजिस्ट्री पर लोन लेना सही निर्णय है?

यदि आपको बड़ी राशि की आवश्यकता है और आपके पास अपने नाम का वैध मकान है, तो लोन अगेंस्ट प्रॉपर्टी एक अच्छा विकल्प हो सकता है। इसकी ब्याज दर सामान्य पर्सनल लोन से कम होती है और भुगतान के लिए लंबी अवधि भी मिल जाती है, जिससे मासिक ईएमआई अपेक्षाकृत कम रहती है।
हालांकि यह भी ध्यान रखना चाहिए कि यह एक सुरक्षित (Secured) लोन होता है, जिसमें मकान के दस्तावेज बैंक के पास गिरवी रहते हैं। यदि लंबे समय तक लोन की किस्तें जमा नहीं की जाती हैं, तो बैंक नियमों के अनुसार संपत्ति की नीलामी की प्रक्रिया शुरू कर सकता है। इसलिए उतनी ही राशि का लोन लें जिसकी ईएमआई आप नियमित रूप से चुका सकें।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)

Q1. क्या मकान की रजिस्ट्री पर बिना नौकरी वाले व्यक्ति को भी लोन मिल सकता है?

यदि आपकी नियमित आय का कोई अन्य स्रोत, जैसे व्यवसाय, किराया या प्रोफेशनल इनकम है तो बैंक लोन दे सकता है। केवल नौकरी होना जरूरी नहीं है, लेकिन आय का प्रमाण देना आवश्यक होता है।

Q2. क्या पुराने मकान की रजिस्ट्री पर भी लोन मिल जाता है?

हाँ, पुराने मकान पर भी लोन मिल सकता है। लेकिन बैंक मकान की वर्तमान स्थिति, उम्र, बाजार मूल्य और कानूनी दस्तावेजों की जांच करने के बाद ही लोन राशि तय करता है।

Q3. क्या लोन लेने के बाद मकान में रह सकते हैं?

हाँ, लोन लेने के बाद भी मकान का कब्जा और उपयोग आपके पास ही रहता है। बैंक केवल संपत्ति के दस्तावेज सुरक्षा के रूप में अपने पास रखता है।

Q4. क्या कम सिबिल स्कोर होने पर मकान की रजिस्ट्री पर लोन मिल सकता है?

कम सिबिल स्कोर होने पर भी कुछ मामलों में लोन मिल सकता है, लेकिन ब्याज दर अधिक हो सकती है या लोन राशि कम स्वीकृत की जा सकती है। अंतिम निर्णय बैंक की जांच पर निर्भर करता है।

Q5. क्या किराए पर दिए गए मकान पर भी लोन मिल सकता है?

हाँ, कई बैंक किराए पर दिए गए मकान पर भी लोन देते हैं। कुछ मामलों में बैंक किरायेदार से एनओसी या किरायानामा जैसी अतिरिक्त जानकारी मांग सकता है।

Q6. मकान की रजिस्ट्री पर लोन मिलने में कितना समय लगता है?

यदि सभी दस्तावेज सही हों और कानूनी व तकनीकी जांच समय पर पूरी हो जाए तो सामान्यतः 10 से 20 कार्य दिवस के भीतर लोन स्वीकृत हो सकता है।

Q7. क्या लोन की अवधि पूरी होने से पहले पूरा भुगतान किया जा सकता है?

हाँ, अधिकांश बैंक समय से पहले लोन चुकाने की सुविधा देते हैं। हालांकि कुछ मामलों में प्रीपेमेंट या फोरक्लोजर से जुड़े नियम और शुल्क लागू हो सकते हैं।

Q8. क्या एक ही मकान पर दो बार लोन लिया जा सकता है?

यदि पहले से लिया गया लोन पूरी तरह चुक चुका है या बैंक की शर्तों के अनुसार पर्याप्त वैल्यू उपलब्ध है, तो कुछ मामलों में टॉप-अप लोन या नया लोन मिल सकता है। यह बैंक की नीति पर निर्भर करता है।

अस्वीकरण / Disclaimer

उपरोक्त लेख मे बताई गई दरें, शुल्क, पात्रता मानदंड, नियम व शर्ते, बैंक या वित्तीय संस्थान के एकमात्र विवेक पर समय-समय पर परिवर्तन / संशोधन के अधीन है। लोन लेने से पहले वर्तमान दर, शुल्क, पात्रता मानदंड, नियम व शर्त की जानकारी बैंक से जरूर लें।

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प्रवीन कुमार

प्रवीन कुमार एक फाइनेंस ब्लॉगर और कंटेंट राइटर हैं, जो पिछले 5 वर्षों से लोन, बैंकिंग, ईएमआई, क्रेडिट स्कोर, SIP, म्यूचुअल फंड, निवेश और वित्तीय जागरूकता जैसे विषयों पर लेख लिख रहे हैं। वे Fincoloan.com और Paisawale.in ब्लॉग के संस्थापक हैं। इन्होंने B.Ed तथा M.Sc. की शिक्षा प्राप्त की है और ‘फाइनेंशियल फ्रीडम कैसे पाएं: नौकरी से निवेश तक का सफर’ नामक हिंदी ई-बुक भी लिखी है।

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