Delinquency और Default में क्या अंतर है? जानिए आपके Credit Score पर इसका असर पड़ेगा
लोन लेना आज के समय में कई लोगों की जरूरत बन चुका है। कोई घर खरीदने के लिए होम लोन लेता है, कोई बिजनेस बढ़ाने के लिए बिजनेस लोन और कई लोग अपनी छोटी-बड़ी जरूरतों के लिए पर्सनल लोन का सहारा लेते हैं। लेकिन लोन लेना जितना आसान लगता है, उसकी EMI समय पर भरना उतना ही जरूरी होता है।
अक्सर लोग EMI कुछ दिन लेट हो जाने को सामान्य बात समझ लेते हैं, जबकि यही छोटी गलती आगे चलकर आपके Credit Score और भविष्य के लोन पर बड़ा असर डाल सकती है। बैंक और वित्तीय संस्थान आपकी भुगतान आदतों को बहुत गंभीरता से देखते हैं। अगर EMI समय पर नहीं भरी जाती तो आपका लोन पहले Delinquent और बाद में Default की श्रेणी में जा सकता है।
कई लोगों को Delinquency, Default और NPA जैसे शब्द समझ नहीं आते। लेकिन अगर आपने कभी लोन लिया है या भविष्य में लेने वाले हैं, तो इन शब्दों को समझना बहुत जरूरी है। इस पोस्ट में आप जानेंगे कि Delinquency क्या होता है, Loan Default क्या होता है, दोनों में क्या अंतर है, Credit Score पर इनका कितना असर पड़ता है और इससे बचने के आसान तरीके क्या हैं।
Delinquency क्या होता है?
जब कोई व्यक्ति अपनी लोन EMI तय तारीख तक जमा नहीं करता या भुगतान देर से करता है, तो उसे Delinquency कहा जाता है। आसान भाषा में समझें तो EMI लेट होना ही Delinquency कहलाता है।
उदाहरण के लिए अगर आपकी EMI हर महीने की 5 तारीख को कटती है और आपने समय पर भुगतान नहीं किया, तो आपका अकाउंट Delinquent माना जा सकता है।
हालांकि शुरुआत में यह स्थिति बहुत गंभीर नहीं होती। बैंक आमतौर पर ग्राहक को कॉल, मैसेज या ईमेल के जरिए रिमाइंडर भेजते हैं ताकि वह जल्द भुगतान कर सके।
अगर ग्राहक कुछ दिनों के भीतर बकाया EMI और लेट फीस जमा कर देता है, तो स्थिति सामान्य हो सकती है।
Delinquency के मुख्य कारण
अधिकतर लोग जानबूझकर EMI नहीं छोड़ते, लेकिन कई बार छोटी वित्तीय परेशानियां या लापरवाही भुगतान में देरी का कारण बन जाती है। शुरुआत में यह सामान्य लगता है, लेकिन लगातार ऐसा होने पर Credit Score खराब होने लगता है और भविष्य में लोन मिलने में दिक्कत आ सकती है। नीचे कुछ सामान्य कारण बताए गए हैं जिनकी वजह से लोग Delinquency की स्थिति में पहुंच जाते हैं।
1. बैंक बैलेंस कम होना
कई लोग EMI भुगतान के लिए Auto Debit सुविधा चालू रखते हैं, लेकिन Due Date पर खाते में पर्याप्त बैलेंस नहीं होता। ऐसे में EMI कट नहीं पाती और बैंक Bounce Charge या Penalty भी लगा सकता है। बार-बार ऐसा होने पर बैंक को लगता है कि ग्राहक अपनी वित्तीय जिम्मेदारियां ठीक से नहीं संभाल पा रहा है।
2. नौकरी या आय में समस्या
अगर किसी व्यक्ति की नौकरी अचानक चली जाए, बिजनेस में नुकसान हो जाए या आय कम हो जाए, तो EMI भरना मुश्किल हो सकता है। कई बार लोग पहले जरूरी घरेलू खर्च पूरे करते हैं और EMI पीछे छूट जाती है। लगातार आर्थिक दबाव Delinquency की सबसे बड़ी वजहों में से एक माना जाता है।
3. एक साथ कई लोन होना
जब किसी व्यक्ति पर पहले से Home Loan, Personal Loan, Car Loan या Credit Card की कई EMI चल रही होती हैं, तो हर महीने भुगतान संभालना कठिन हो जाता है। थोड़ी सी आय में कमी या अतिरिक्त खर्च आने पर EMI मिस होने की संभावना बढ़ जाती है। ज्यादा कर्ज हमेशा वित्तीय दबाव बढ़ाता है।
4. ईएमआई तारीख भूल जाना
कुछ लोग EMI की Due Date याद नहीं रख पाते, खासकर जब कई बैंक अकाउंट या अलग-अलग भुगतान चल रहे हों। छोटी सी लापरवाही भी Late Payment का कारण बन सकती है। हालांकि यह जानबूझकर नहीं होता, लेकिन बैंक और Credit Bureau इसे भी Negative Payment History के रूप में रिकॉर्ड कर सकते हैं।
Delinquency का Credit Score पर कितना असर होता हैं?
अगर EMI कुछ दिन लेट हो जाए और आप जल्दी भुगतान कर दें, तो इसका असर सीमित रह सकता है। लेकिन जब Late Payment बार-बार होने लगती है, तब Credit Score धीरे-धीरे गिरने लगता है। Credit Bureau जैसे CIBIL, Experian और Equifax आपकी पूरी Payment History रिकॉर्ड करते हैं। लगातार Delinquency दिखाई देने पर बैंक और वित्तीय संस्थान आपको जोखिम वाला ग्राहक मान सकते हैं, जिससे भविष्य में लोन और Credit Card लेने में कई परेशानियां आ सकती हैं।
इसकी वजह से होने वाली संभावित दिक्कतें
- भविष्य में Loan Approval मिलने में परेशानी हो सकती है
- Credit Card आवेदन रिजेक्ट हो सकता है
- बैंक ज्यादा ब्याज दर पर लोन दे सकते हैं
- कम Loan Amount Approved हो सकता है
- Instant Loan सुविधा बंद हो सकती है
- Pre-approved Loan Offers कम हो सकते हैं
- Home Loan या Car Loan मिलने में देरी हो सकती है
- Co-applicant या Guarantor की जरूरत पड़ सकती है
- Financial Reputation खराब हो सकती है
- Emergency में जल्दी Loan मिलना मुश्किल हो सकता है
Default क्या होता है?
जब कोई व्यक्ति लगातार लंबे समय तक अपनी Loan EMI जमा नहीं करता, तब उसकी स्थिति Delinquency से आगे बढ़कर Loan Default कहलाती है। आमतौर पर अगर 90 दिनों से ज्यादा समय तक EMI बकाया रहती है, तो बैंक उस अकाउंट को Default की श्रेणी में डाल सकते हैं। यह स्थिति काफी गंभीर मानी जाती है क्योंकि बैंक को लगने लगता है कि ग्राहक अब भुगतान करने में सक्षम नहीं है। Loan Default होने के बाद Credit Score तेजी से गिर सकता है और भविष्य में किसी भी प्रकार का लोन लेना मुश्किल हो सकता है।
Loan Default होने पर क्या होता है?
Loan Default होने के बाद बैंक और वित्तीय संस्थान बकाया राशि वसूलने के लिए कई सख्त कदम उठा सकते हैं। इसका असर केवल वर्तमान लोन तक सीमित नहीं रहता बल्कि व्यक्ति की पूरी Financial Profile प्रभावित हो सकती है। नीचे कुछ मुख्य प्रभाव बताए गए हैं।
1. Recovery Process शुरू हो सकता है
जब ग्राहक लंबे समय तक EMI जमा नहीं करता, तो बैंक Recovery Process शुरू कर सकते हैं। इसके तहत बैंक Recovery Agent के जरिए ग्राहक से संपर्क करते हैं और बकाया राशि जमा करने के लिए लगातार दबाव बना सकते हैं। कई बार बार-बार कॉल, नोटिस और विजिट भी की जा सकती हैं ताकि भुगतान जल्द किया जा सके।
2. Legal Notice मिल सकता है
अगर लंबे समय तक कोई भुगतान नहीं किया जाता, तो बैंक कानूनी कार्रवाई भी शुरू कर सकते हैं। ग्राहक को Legal Notice भेजा जा सकता है जिसमें तय समय के भीतर बकाया राशि जमा करने के लिए कहा जाता है। स्थिति ज्यादा गंभीर होने पर मामला कोर्ट तक भी पहुंच सकता है, जिससे अतिरिक्त तनाव और खर्च बढ़ सकता है।
3. संपत्ति जब्त हो सकती है
अगर आपने Secured Loan लिया है जैसे Home Loan, Car Loan या Property Loan, तो बैंक के पास आपकी संपत्ति कब्जे में लेने का अधिकार हो सकता है। लगातार Default की स्थिति में बैंक वाहन या घर को जब्त करके उसकी नीलामी तक कर सकते हैं ताकि बकाया रकम की भरपाई की जा सके।
4. Credit Score बुरी तरह गिर सकता है
Loan Default का सबसे बड़ा असर Credit Score पर पड़ता है। Default की जानकारी Credit Report में कई वर्षों तक दिखाई दे सकती है। इससे भविष्य में नया Loan, Credit Card या किसी भी प्रकार की Financial सुविधा प्राप्त करना काफी मुश्किल हो सकता है। कई बैंक ऐसे ग्राहकों को High Risk Category में रख देते हैं।
Default का Credit Score पर असर
Loan Default आपके Credit Score को बहुत गंभीर नुकसान पहुंचा सकता है। जब कोई व्यक्ति लंबे समय तक EMI जमा नहीं करता, तो इसकी जानकारी Credit Bureau तक पहुंच जाती है। कई मामलों में Credit Score 100 से 200 अंक तक गिर सकता है और इसका असर कई वर्षों तक बना रह सकता है। बैंक और वित्तीय संस्थान ऐसे ग्राहकों को वित्तीय रूप से जोखिम वाला मानने लगते हैं। इसके कारण भविष्य में नया लोन लेना, Credit Card प्राप्त करना या कम ब्याज दर पर फाइनेंस सुविधा पाना काफी मुश्किल हो सकता है।
Loan Default की वजह से होने वाली गंभीर परेशानियां
- नया Loan Approval बार-बार रिजेक्ट हो सकता है
- Credit Card मिलने की संभावना बहुत कम हो सकती है
- Home Loan या Car Loan लेने में बड़ी दिक्कत आ सकती है
- बैंक ज्यादा ब्याज दर वसूल सकते हैं
- Pre-approved Loan Offers बंद हो सकते हैं
- Emergency में तुरंत Loan मिलना मुश्किल हो सकता है
- बैंक आपको High Risk Customer मान सकते हैं
- Guarantor या Co-applicant की जरूरत पड़ सकती है
- Financial Reputation खराब हो सकती है
- कई वर्षों तक Credit Report प्रभावित रह सकती है
Delinquency और Default में मुख्य अंतर
Delinquency और Default दोनों ही लोन भुगतान से जुड़ी स्थितियां हैं, लेकिन दोनों की गंभीरता, समय अवधि और Credit Score पर असर अलग-अलग होता है। नीचे इनके मुख्य अंतर को आसान भाषा में समझाया गया है।
| आधार | Delinquency | Default |
|---|---|---|
| स्थिति | EMI लेट होना | लंबे समय तक EMI न भरना |
| समय | कुछ दिन या शुरुआती देरी | आमतौर पर 90 दिन से ज्यादा |
| गंभीरता | कम | बहुत ज्यादा |
| समाधान | EMI और Penalty भरकर ठीक हो सकता है | Recovery Process शुरू हो सकता है |
| Credit Score पर असर | हल्का या मध्यम असर | गंभीर नुकसान हो सकता है |
NPA क्या होता है?
NPA यानी Non-Performing Asset एक बैंकिंग शब्द है जिसका इस्तेमाल ऐसे लोन के लिए किया जाता है जिनसे बैंक को आय मिलना बंद हो जाती है। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के नियमों के अनुसार अगर किसी लोन की EMI या ब्याज 90 दिनों से ज्यादा समय तक बकाया रहता है, तो बैंक उस लोन अकाउंट को NPA घोषित कर सकते हैं। यह स्थिति बैंक और ग्राहक दोनों के लिए गंभीर मानी जाती है।
NPA के प्रकार
1. Sub-standard Asset
जब कोई लोन 12 महीने से कम समय तक NPA की स्थिति में रहता है, तो उसे Sub-standard Asset कहा जाता है। इस स्थिति में बैंक को नुकसान का खतरा तो रहता है, लेकिन सही कदम उठाने पर पैसे वापस मिलने की संभावना भी बनी रहती है। इसलिए बैंक Recovery पर ज्यादा ध्यान देते हैं।
2. Doubtful Asset
जब लोन लंबे समय तक बकाया रहता है और ग्राहक की तरफ से भुगतान की संभावना लगातार कम होने लगती है, तब उसे Doubtful Asset माना जाता है। इस स्थिति में बैंक को Recovery को लेकर ज्यादा चिंता रहती है क्योंकि पैसा वापस मिलने की उम्मीद काफी कमजोर हो जाती है।
3. Loss Asset
जब बैंक को यह लगने लगता है कि अब लोन की राशि वापस मिलना लगभग असंभव है, तब उसे Loss Asset कहा जाता है। ऐसे मामलों में बैंक भारी नुकसान मानते हैं और कई बार ऐसे लोन को Write Off भी कर देते हैं ताकि उन्हें अपनी बैलेंस शीट में अलग दिखाया जा सके।
क्या एक EMI लेट होने से बड़ा नुकसान हो सकता है?
अगर एक बार EMI लेट होती है और उसका तुरंत लेट पेमेंट फीस के साथ भुगतान कर दिया जाता है, तो बहुत बड़ा नुकसान नहीं होता। लेकिन अगर यह आपकी बार बार करने की आदत बन जाए, तो धीरे-धीरे Credit Profile खराब होने लगती है।
क्योंकि बैंक लोन देते वक्त सिर्फ आपकी कमाई नहीं देखते बल्कि यह भी देखते हैं कि आप पैसे लौटाने में कितने जिम्मेदार हैं।
Delinquency और Default से कैसे बचें?
1. Auto Debit चालू रखें
अपने बैंक खाते में Auto Debit सुविधा चालू रखने से EMI समय पर कटने की संभावना बढ़ जाती है। इससे Due Date भूलने की समस्या भी कम हो जाती है। हालांकि Auto Debit तभी सही काम करेगा जब खाते में पर्याप्त बैलेंस मौजूद हो, इसलिए समय-समय पर अकाउंट जरूर चेक करते रहें।
2. बैंक खाते में बैलेंस रखें
EMI कटने की तारीख से पहले अपने खाते में पर्याप्त राशि जरूर रखें। अगर बैलेंस कम होगा तो EMI Bounce हो सकती है और Penalty भी लग सकती है। बार-बार ऐसा होने पर Credit Score प्रभावित होने लगता है, इसलिए Due Date से पहले फंड मैनेज करना जरूरी होता है।
3. Emergency Fund बनाएं
जीवन में अचानक नौकरी जाने, बिजनेस नुकसान या मेडिकल खर्च जैसी परिस्थितियां आ सकती हैं। ऐसे समय में Emergency Fund बहुत मदद करता है। कोशिश करें कि कम से कम 6 महीने के खर्च और EMI के बराबर राशि अलग बचाकर रखें ताकि कठिन समय में भी Loan Payment जारी रह सके।
4. कम EMI चुनें
हमेशा उतनी ही EMI चुनें जिसे आपकी मासिक आय आसानी से संभाल सके। ज्यादा Loan Amount या भारी EMI लेने से भविष्य में आर्थिक दबाव बढ़ सकता है। सुरक्षित तरीका यही है कि EMI आपकी कुल मासिक आय का बहुत बड़ा हिस्सा न बने और बाकी जरूरी खर्च भी आराम से पूरे हो सकें।
5. कई लोन लेने से बचें
एक साथ कई Loan और Credit Card EMI चलने से वित्तीय दबाव तेजी से बढ़ सकता है। छोटी आय में ज्यादा EMI संभालना मुश्किल हो जाता है और Delinquency का खतरा बढ़ जाता है। इसलिए जरूरत पड़ने पर ही नया Loan लें और पहले पुराने कर्ज को कम करने की कोशिश करें।
अगर EMI भरने में दिक्कत हो रही हो तो क्या करें?
कई बार अचानक आर्थिक परेशानी आने पर EMI समय पर भरना मुश्किल हो जाता है। ऐसी स्थिति में सबसे बड़ी गलती समस्या को नजरअंदाज करना होती है। अगर आपको पहले से लगता है कि आने वाले महीनों में EMI भुगतान प्रभावित हो सकता है, तो तुरंत बैंक या वित्तीय संस्था से संपर्क करना चाहिए। कई बैंक ग्राहकों को राहत देने के लिए अलग-अलग विकल्प उपलब्ध कराते हैं जिससे Default की स्थिति से बचा जा सकता है।
1. EMI Restructuring करें
EMI Restructuring में बैंक आपकी मौजूदा EMI को आपकी आय और भुगतान क्षमता के अनुसार दोबारा व्यवस्थित कर सकते हैं। इसमें EMI कम की जा सकती है या Loan अवधि बढ़ाई जा सकती है। इससे हर महीने का वित्तीय दबाव कम होता है और ग्राहक नियमित भुगतान जारी रख सकता है।
2. Moratorium अवधि का इस्तेमाल करें
Moratorium एक ऐसी सुविधा होती है जिसमें कुछ समय के लिए EMI भुगतान रोकने की अनुमति दी जाती है। यह सुविधा नौकरी जाने, बिजनेस नुकसान या किसी बड़ी आर्थिक परेशानी के समय मददगार साबित हो सकती है। हालांकि इस दौरान ब्याज जुड़ता रहता है, इसलिए इसे समझदारी से इस्तेमाल करना चाहिए।
3. बढ़ाने पर विचार करें
अगर EMI ज्यादा भारी लग रही हो, तो बैंक Loan Tenure बढ़ाने का विकल्प दे सकते हैं। इससे हर महीने की EMI कम हो जाती है और भुगतान आसान हो सकता है। हालांकि लंबी अवधि के कारण कुल ब्याज ज्यादा देना पड़ सकता है, इसलिए निर्णय सोच-समझकर लेना चाहिए।
4. Settlement के विकल्प चुनें
जब ग्राहक लंबे समय तक भुगतान नहीं कर पाता, तब कुछ मामलों में बैंक Settlement Option भी दे सकते हैं। इसमें बैंक एक तय राशि लेकर Loan बंद करने की अनुमति देते हैं। लेकिन Loan Settlement का असर Credit Score पर नकारात्मक पड़ सकता है, इसलिए इसे अंतिम विकल्प के रूप में ही देखना चाहिए।
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अच्छा Credit Score क्यों जरूरी है?
Credit Score आपकी वित्तीय विश्वसनीयता को दिखाने वाला एक महत्वपूर्ण नंबर होता है। बैंक और वित्तीय संस्थान इसी के आधार पर तय करते हैं कि आपको Loan या Credit Card देना सुरक्षित है या नहीं। अच्छा Credit Score होने पर Loan Approval जल्दी मिल सकता है, ब्याज दर कम हो सकती है और ज्यादा Loan Amount मिलने की संभावना भी बढ़ जाती है। वहीं खराब Credit Score भविष्य में कई आर्थिक परेशानियां पैदा कर सकता है। इसलिए इसे बनाए रखना बहुत जरूरी माना जाता है।
अच्छा Credit Score कैसे बनाए?
1. समय पर EMI और Credit Card Bill भरें
Credit Score अच्छा बनाए रखने का सबसे महत्वपूर्ण तरीका समय पर भुगतान करना है। चाहे Loan EMI हो या Credit Card Bill, हर भुगतान तय तारीख से पहले करने की आदत डालें। लगातार समय पर भुगतान करने से बैंक और Credit Bureau के सामने आपकी अच्छी वित्तीय छवि बनती है।
2. Credit Card Limit का कम इस्तेमाल करें
अगर आपके पास Credit Card है, तो उसकी पूरी Limit इस्तेमाल करने से बचें। कोशिश करें कि कुल Limit का केवल 30% से 40% तक ही उपयोग करें। ज्यादा Credit Utilization बैंक को यह संकेत दे सकता है कि आप कर्ज पर अधिक निर्भर हैं, जिससे Score प्रभावित हो सकता है।
3. एक साथ कई Loan लेने से बचें
बार-बार नया Loan या कई Credit Card लेने से आपकी Debt जिम्मेदारी बढ़ जाती है। बैंक इसे Financial Pressure के रूप में देख सकते हैं। इसलिए केवल जरूरत पड़ने पर ही Loan लें और पुरानी देनदारियों को समय पर खत्म करने की कोशिश करें।
4. Credit Report नियमित चेक करें
समय-समय पर अपनी Credit Report जरूर जांचें ताकि किसी गलत जानकारी या Fraud का पता चल सके। कई बार रिपोर्ट में गलत Late Payment या Loan Entry दिखाई दे सकती है। ऐसी गलती जल्दी सुधारने से आपका Credit Score सुरक्षित रह सकता है।
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5. पुराने Credit Account बंद न करें
अगर आपके पुराने Loan या Credit Card Account का रिकॉर्ड अच्छा है, तो उन्हें तुरंत बंद करने से बचें। लंबे समय तक अच्छा Payment History आपके Credit Score को मजबूत बनाने में मदद करता है और बैंक को आपकी Financial Stability का संकेत देता है।
6. Auto Debit और Reminder का इस्तेमाल करें
EMI और Bill Payment भूलने से बचने के लिए Auto Debit या मोबाइल Reminder का उपयोग करें। इससे Due Date मिस होने की संभावना कम हो जाती है। छोटी-छोटी Late Payment भी धीरे-धीरे Credit Score पर असर डाल सकती हैं, इसलिए समय पर भुगतान बहुत जरूरी है।
निष्कर्ष (Conclusion):
Delinquency और Default दोनों ही लोन भुगतान से जुड़ी स्थितियां हैं, लेकिन दोनों की गंभीरता अलग होती है। EMI का थोड़ा लेट होना Delinquency कहलाता है जबकि लंबे समय तक भुगतान न करना Default माना जाता है।
लोन लेने के बाद शुरुआत में छोटी लापरवाही लगने वाली चीज आगे चलकर Credit Score खराब कर सकती है और भविष्य में लोन मिलने में परेशानी पैदा कर सकती है। इसलिए हमेशा कोशिश करें कि EMI समय पर भरें और अपनी वित्तीय स्थिति को संतुलित रखें।
याद रखें, अच्छा Credit Score सिर्फ एक नंबर नहीं बल्कि आपकी आर्थिक विश्वसनीयता की पहचान होता है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
Q1. Delinquency का मतलब क्या होता है?
जब कोई व्यक्ति Loan EMI या Credit Card भुगतान तय समय पर नहीं करता और भुगतान लेट हो जाता है, तो उसे Delinquency कहा जाता है। शुरुआत में यह छोटी समस्या लग सकती है, लेकिन लगातार ऐसा होने पर Credit Score प्रभावित होने लगता है।
Q2. Loan Default कब माना जाता है?
आमतौर पर जब कोई ग्राहक 90 दिनों या उससे ज्यादा समय तक लगातार EMI जमा नहीं करता, तब बैंक उस Loan Account को Default की श्रेणी में डाल सकते हैं। यह स्थिति गंभीर मानी जाती है और भविष्य की Borrowing क्षमता पर असर डाल सकती है।
Q3. क्या एक EMI लेट होने से CIBIL Score खराब हो सकता है?
अगर एक बार EMI थोड़ी लेट हो जाए और जल्दी भुगतान कर दिया जाए, तो असर सीमित हो सकता है। लेकिन बार-बार Late Payment होने पर CIBIL Score धीरे-धीरे गिरने लगता है और बैंक आपको जोखिम वाला ग्राहक मान सकते हैं।
Q4. NPA क्या होता है?
NPA यानी Non-Performing Asset वह Loan होता है जिससे बैंक को आय मिलना बंद हो जाती है। RBI के नियमों के अनुसार अगर EMI या ब्याज 90 दिनों से ज्यादा समय तक बकाया रहे, तो बैंक उस Loan को NPA घोषित कर सकते हैं।
Q5. क्या Loan Default के बाद नया Loan मिल सकता है?
हाँ, Loan Default के बाद भी नया Loan मिल सकता है, लेकिन यह काफी मुश्किल हो जाता है। बैंक ऐसे ग्राहकों को High Risk मानते हैं और कई बार ज्यादा ब्याज दर या अतिरिक्त गारंटी की मांग कर सकते हैं।
Q6. Credit Score सुधारने के लिए क्या करें?
Credit Score सुधारने के लिए समय पर EMI और Credit Card Bill भुगतान करें। ज्यादा Loan लेने से बचें, Credit Utilization कम रखें और अपनी Credit Report समय-समय पर जांचते रहें ताकि गलत जानकारी को सुधारा जा सके।
Q7. क्या बार-बार EMI Bounce होने से Loan मिलने में दिक्कत आती है?
हाँ, लगातार EMI Bounce होने से आपकी Payment History खराब हो सकती है। बैंक इसे Financial Discipline की कमी मान सकते हैं, जिससे भविष्य में Loan Approval मिलने में परेशानी और ज्यादा ब्याज दर का सामना करना पड़ सकता है।
Q8. क्या बैंक EMI भुगतान में राहत दे सकते हैं?
अगर किसी व्यक्ति को आर्थिक परेशानी हो रही हो, तो कई बैंक EMI Restructuring, Moratorium या Loan Tenure बढ़ाने जैसी सुविधाएं दे सकते हैं। इसलिए समस्या बढ़ने से पहले बैंक से बात करना हमेशा बेहतर माना जाता है।
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