लोन प्रीपेमेंट क्या है और इससे लोन अवधि, EMI और ब्याज पर क्या असर पड़ता है

लोन प्रीपेमेंट क्या है और इससे लोन अवधि, EMI और ब्याज पर क्या असर पड़ता है?

लोन लेते समय ज्यादातर लोगों का ध्यान इस बात पर रहता है कि उन्हें कितनी लोन राशि मिलेगी और हर महीने कितनी EMI चुकानी होगी। लेकिन लोन शुरू होने के कुछ महीनों या वर्षों बाद स्थिति बदल सकती है। सैलरी बढ़ सकती है, बोनस मिल सकता है, कारोबार से अतिरिक्त आमदनी हो सकती है या बचत में एक बड़ी रकम जमा हो सकती है। ऐसे में मन में एक सवाल आना स्वाभाविक है—क्या इस अतिरिक्त पैसे से लोन का कुछ हिस्सा समय से पहले चुका देना चाहिए?

यहीं से लोन प्रीपेमेंट की बात शुरू होती है। लोन प्रीपेमेंट का सही इस्तेमाल आपके बकाया मूलधन को कम कर सकता है, लोन की अवधि घटा सकता है और भविष्य में चुकाए जाने वाले ब्याज में अच्छी बचत कर सकता है। आंशिक भुगतान के बाद लोन की EMI कम हो सकती है या वही EMI रखते हुए लोन जल्दी समाप्त किया जा सकता है। यह आपके बैंक या वित्तीय संस्था की शर्तों और चुने गए विकल्प पर निर्भर करता है।

लेकिन केवल अतिरिक्त पैसा उपलब्ध होना ही प्रीपेमेंट करने का कारण नहीं होना चाहिए। प्रीपेमेंट शुल्क, लोन की ब्याज दर, बची हुई अवधि, आपातकालीन बचत और भविष्य की जरूरतों को भी समझना जरूरी है।

इस पोस्ट में हम आसान भाषा में जानेंगे कि लोन प्रीपेमेंट क्या है, इससे लोन अवधि, EMI और ब्याज पर क्या असर पड़ता है, प्रीपेमेंट कब करना फायदेमंद हो सकता है और अतिरिक्त पैसा जमा करने से पहले किन बातों की जांच करनी चाहिए।

Table of Contents

लोन प्रीपेमेंट क्या है और इससे लोन अवधि, EMI और ब्याज पर क्या असर पड़ता है

लोन प्रीपेमेंट (Prepayment) क्या है?

जब आप अपनी नियमित EMI के अलावा बैंक या वित्तीय संस्था को अतिरिक्त राशि देकर लोन का कुछ हिस्सा या पूरा बकाया लोन तय समय से पहले चुका देते हैं, तो इसे लोन प्रीपेमेंट कहा जाता है।
इसे एक आसान उदाहरण से समझते हैं।

मान लीजिए आपने ₹10 लाख का लोन लिया है और हर महीने उसकी EMI चुका रहे हैं। कुछ समय बाद आपके लोन का बकाया मूलधन ₹8 लाख रह जाता है। इसी दौरान आपको ₹1 लाख का बोनस मिलता है और आप यह ₹1 लाख बैंक में लोन के अतिरिक्त भुगतान के रूप में जमा कर देते हैं।
यदि यह राशि मूलधन में समायोजित होती है, तो आपका बकाया मूलधन लगभग ₹8 लाख से घटकर ₹7 लाख रह सकता है। इसके बाद भविष्य का ब्याज कम बकाया राशि के आधार पर जुड़ता है।
यही लोन प्रीपेमेंट का मुख्य लाभ है।
हालांकि वास्तविक बकाया राशि, ब्याज की गणना और नया भुगतान कार्यक्रम बैंक की गणना तथा आपके लोन समझौते के अनुसार तय होगा।

लोन प्रीपेमेंट की मुख्य जानकारी

बिन्दुजानकारी
प्रीपेमेंट का अर्थतय समय से पहले लोन का अतिरिक्त भुगतान
भुगतान का प्रकारआंशिक या पूर्ण भुगतान
मुख्य असरबकाया मूलधन कम हो सकता है
EMI पर असरEMI कम हो सकती है
अवधि पर असरलोन जल्दी समाप्त हो सकता है
ब्याज पर असरकुल ब्याज में बचत हो सकती है
शुल्कलोन और बैंक की शर्तों पर निर्भर
सही समयआमतौर पर लोन के शुरुआती हिस्से में अधिक लाभ
जरूरी जांचलोन समझौता और प्रीपेमेंट नियम

लोन प्रीपेमेंट कितने प्रकार का होता है?

लोन प्रीपेमेंट को मुख्य रूप से दो प्रकार से समझा जा सकता है। पहला आंशिक प्रीपेमेंट और दूसरा पूर्ण प्रीपेमेंट।

1. आंशिक प्रीपेमेंट क्या है?

आंशिक प्रीपेमेंट (Partial Prepayment) में आप पूरे लोन को बंद नहीं करते बल्कि नियमित EMI के अतिरिक्त एक बड़ी या छोटी राशि जमा करके बकाया मूलधन का कुछ हिस्सा कम करते हैं।
उदाहरण के लिए, आपके लोन पर ₹6 लाख बकाया है और आप ₹50,000 अतिरिक्त जमा करते हैं। बैंक की शर्तों के अनुसार यह ₹50,000 मूलधन में समायोजित होने पर आपकी बकाया राशि कम हो जाती है।

इसे कई जगह पार्ट-प्रीपेमेंट या पार्ट-पेमेंट भी कहा जाता है।
आंशिक प्रीपेमेंट के बाद बैंक आपकी EMI कम कर सकता है या EMI पहले जैसी रखते हुए लोन अवधि घटा सकता है। यह उपलब्ध विकल्प और लोन की शर्तों पर निर्भर करता है।

2. पूर्ण प्री-पेमेंट क्या है?

जब आप लोन की पूरी बकाया राशि समय से पहले चुका कर लोन बंद कर देते हैं, तो इसे पूर्ण प्रीपेमेंट या फोरक्लोजर कहा जाता है।
मान लीजिए आपके पर्सनल लोन की 24 EMI अभी बाकी हैं, लेकिन आपके पास पर्याप्त पैसा उपलब्ध हो गया है। आप बैंक से फोरक्लोजर राशि की जानकारी लेते हैं और पूरी बकाया राशि तथा लागू शुल्क का भुगतान करके लोन बंद कर देते हैं। लोन बंद करने के बाद बैंक से लोन क्लोजर प्रमाणपत्र या नो ड्यूज प्रमाणपत्र लेना जरूरी है।

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लोन प्रीपेमेंट करने से मूलधन पर क्या असर पड़ता है?

प्रीपेमेंट का पहला और सबसे महत्वपूर्ण असर आपके बकाया मूलधन पर पड़ता है।
लोन की EMI में सामान्यतः मूलधन और ब्याज दोनों शामिल होते हैं। आप हर महीने EMI चुकाते हैं और धीरे-धीरे मूलधन कम होता जाता है।
लेकिन जब आप अतिरिक्त राशि का प्रीपेमेंट करते हैं, तो बकाया मूलधन एक साथ कम हो सकता है।

मान लीजिए:
बकाया लोन राशि ₹10 लाख है।
आप ₹2 लाख का आंशिक प्रीपेमेंट करते हैं।
यदि पूरी प्रीपेमेंट राशि मूलधन में समायोजित होती है, तो बकाया मूलधन लगभग ₹8 लाख रह सकता है।
अब भविष्य में ब्याज ₹10 लाख के बजाय घटे हुए बकाया मूलधन के आधार पर लगेगा। इसी कारण प्रीपेमेंट से कुल ब्याज कम हो जाता है।

प्रीपेमेंट से लोन अवधि पर क्या असर पड़ता है?

यदि प्रीपेमेंट के बाद आप अपनी EMI पहले जितनी ही रखते हैं, तो सामान्यतः लोन की बची हुई अवधि कम हो सकती है।

मान लीजिए आपकी EMI ₹20,000 है और लोन समाप्त होने में अभी 5 वर्ष बाकी हैं। आपने लोन का एक बड़ा हिस्सा समय से पहले चुका दिया।
अब यदि आप ₹20,000 की EMI पहले की तरह चुकाते रहते हैं, तो कम बकाया मूलधन के कारण आपका लोन 5 वर्ष से पहले समाप्त हो सकता है।
आंशिक भुगतान के बाद EMI समान रखने पर अवधि कम हो सकती है। इससे लोन जल्दी समाप्त होता है और लंबे समय तक लगने वाले ब्याज में भी बचत हो सकती है।

यदि आप प्रीपेमेंट करने से पहले लोन की अवधि, ब्याज व कुल बचत मे हुए बदलाव जानना चाहते है तो आप हमारे Loan Prepayment Calculator (लोन प्री-पेमेंट कैलकुलेटर) का उपयोग करके सभी जरूरी बातों को आसानी से जान सकते है।

अवधि कम होने के मुख्य फायदे

  • लोन जल्दी समाप्त हो सकता है।
  • कुल ब्याज कम हो सकता है।
  • लंबे समय तक EMI चुकाने की जिम्मेदारी घट सकती है।
  • भविष्य में नई वित्तीय योजनाओं के लिए पैसा उपलब्ध हो सकता है।
  • कर्ज का कुल बोझ जल्दी कम हो सकता है।
  • यदि आपकी मासिक आय स्थिर है और मौजूदा EMI चुकाने में परेशानी नहीं हो रही, तो प्रीपेमेंट के बाद अवधि कम करने का विकल्प ब्याज बचाने के लिए उपयोगी हो सकता है।

प्रीपेमेंट से EMI पर क्या असर पड़ता है?

प्रीपेमेंट के बाद दूसरा विकल्प EMI कम करने का हो सकता है।
इस स्थिति में बैंक लोन की बची हुई अवधि लगभग पहले जैसी रख सकता है और कम बकाया मूलधन के आधार पर नई EMI की गणना कर सकता है।

उदाहरण के लिए, आपकी मौजूदा EMI ₹25,000 है। आपने एक बड़ी राशि का प्रीपेमेंट किया। इसके बाद बकाया मूलधन कम हो गया।
यदि बैंक अवधि समान रखते हुए EMI की दोबारा गणना करता है, तो आपकी नई EMI ₹25,000 से कम हो सकती है।
वास्तविक नई EMI ब्याज दर, बकाया राशि और बची हुई अवधि के आधार पर तय होगी।

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EMI कम करना किन लोगों के लिए उपयोगी हो सकता है?

EMI कम करने का विकल्प उन लोगों के लिए उपयोगी हो सकता है जिनकी मासिक आय पर खर्च का दबाव अधिक है। बच्चों की पढ़ाई, घर का खर्च, दूसरी EMI या अन्य जिम्मेदारियों के कारण हर महीने बचत कम हो रही है, तो कम EMI से मासिक बजट में कुछ राहत मिल सकती है।
लेकिन यहां एक बात समझना जरूरी है। EMI कम करने और अवधि कम करने से होने वाली ब्याज बचत समान नहीं होती। यदि आप मौजूदा EMI आसानी से चुका सकते हैं, तो वही EMI जारी रखकर अवधि कम करना कुल ब्याज बचाने के लिहाज से अधिक उपयोगी हो सकता है।

EMI कम करें या लोन अवधि?

लोन का प्रीपेमेंट करने के बाद बहुत से सोचते है कि अब लोन की अवधि कम करे या मासिक EMI कम करे लेकिन हम आपको बटन चाहते है कि आमतौर पर प्रीपेमेंट का मुख्य फायदा लोन की बची हुई अवधि कम करने में दिखाई देता है और EMI लगभग पहले जितनी ही रखी जा सकती है। हालांकि बैंक या वित्तीय संस्था के नियम और आपके द्वारा चुना गया विकल्प इसमें महत्वपूर्ण होता है।

जब आप लोन की नियमित EMI के अलावा अतिरिक्त राशि जमा करते हैं और वह राशि बकाया मूलधन में समायोजित हो जाती है, तो आपके लोन का मूलधन एक साथ कम हो जाता है। इसके बाद यदि आप पहले जितनी EMI चुकाना जारी रखते हैं, तो हर महीने चुकाई जाने वाली राशि में मूलधन का हिस्सा तेजी से कम होता जाता है और लोन तय समय से पहले समाप्त हो सकता है।

उदाहरण के लिए, मान लीजिए आपकी मौजूदा EMI ₹25,000 है और लोन समाप्त होने में अभी 5 वर्ष बाकी हैं। आपने अपनी बचत या बोनस से एक बड़ी राशि का प्रीपेमेंट कर दिया। अब आपका बकाया मूलधन पहले से कम हो गया है। यदि आप ₹25,000 की EMI पहले की तरह जारी रखते हैं, तो संभव है कि आपको पूरे 5 वर्ष तक EMI न चुकानी पड़े और आपका लोन इससे पहले ही समाप्त हो जाए।

यानी प्रीपेमेंट करने के बाद EMI को लगभग समान रखते हुए लोन अवधि कम करना ब्याज बचाने के लिहाज से अधिक उपयोगी हो सकता है। इसका कारण यह है कि लोन जितने कम समय तक चलेगा, उतने कम समय तक आपको बकाया राशि पर ब्याज चुकाना पड़ेगा।

यदि आप प्रीपेमेंट के बाद EMI कम करने का विकल्प चुनते हैं तो ऐसी स्थिति में लोन की बची हुई अवधि को लगभग समान रखते हुए कम बकाया मूलधन के आधार पर EMI की दोबारा गणना की जाएगी जिससे हर महीने चुकाई जाने वाली EMI कम हो सकती है और इससे आपके मासिक बजट पर दबाव घट सकता है।
लेकिन एक बार और जान लें कि केवल EMI कम करना हमेशा अधिक ब्याज बचाने वाला विकल्प नहीं होता।

एक और उदाहरण से समझिए
मान लीजिए प्रीपेमेंट के बाद आपकी EMI ₹25,000 से घटाकर ₹20,000 कर दी जाती है। अब हर महीने आपकी जेब से ₹5,000 कम जाएंगे, लेकिन यदि लोन की अवधि लंबी रहती है तो आपको लंबे समय तक ब्याज का भुगतान करना पड़ेगा। वहीं, ₹25,000 की पुरानी EMI जारी रखने पर बकाया मूलधन तेजी से कम हो सकता है और लोन जल्दी समाप्त हो सकता है।

यहां एक बात समझना जरूरी है कि EMI कम करने के लिए लोन अवधि को लंबा रखने या दोबारा बढ़ाने से कुल ब्याज भुगतान बढ़ सकता है। कम EMI देखने में राहत देने वाली लग सकती है, लेकिन लंबी अवधि के कारण आपको अधिक महीनों या वर्षों तक ब्याज देना पड़ सकता है।

इसलिए यदि आपकी आय स्थिर है और मौजूदा EMI चुकाने में कोई परेशानी नहीं हो रही है, तो प्रीपेमेंट के बाद EMI कम करवाने के बजाय मौजूदा EMI जारी रखते हुए लोन अवधि कम करना बेहतर हो सकता है। इससे लोन जल्दी समाप्त होगा और कुल ब्याज में अधिक बचत की संभावना रहती है।

वहीं, यदि आपकी मासिक आय कम हो गई है, घर के खर्च बढ़ गए हैं या मौजूदा EMI चुकाने में परेशानी हो रही है, तो EMI कम करने का विकल्प आपके मासिक बजट को संभालने में मदद कर सकता है। ऐसी स्थिति में कम EMI चुनना गलत नहीं है, लेकिन आपको यह जरूर देखना चाहिए कि इससे लोन की अवधि और कुल ब्याज पर कितना असर पड़ेगा।

प्रीपेमेंट के बाद बैंक से नई पुनर्भुगतान अनुसूची जरूर लें और उसमें देखें कि EMI कितनी है, लोन की नई अवधि क्या है और अनुमानित कुल ब्याज कितना चुकाना होगा। इसके बाद EMI कम करने और अवधि कम करने के दोनों विकल्पों की तुलना करके फैसला करें।

सीधे शब्दों में कहें तो लोन प्रीपेमेंट का असली फायदा केवल EMI कम करना नहीं, बल्कि बकाया मूलधन घटाकर लोन की अवधि और कुल ब्याज को कम करना है। यदि आप पुरानी EMI आसानी से चुका सकते हैं, तो उसे लगभग समान रखते हुए अवधि कम करना आमतौर पर अधिक फायदेमंद हो सकता है।

वहीं, यदि आप लोन मौजूदा अवधि या EMI मे बदलाव यानि लोन रि-स्ट्रक्चर करना चाहते है तो ऐसा करने से पहले आप हमारे Loan Restructure Calculator (लोन रि-स्ट्रक्चर कैलकुलेटर) का इस्तेमाल कर सकते है। हमारे लोन रि-स्ट्रक्चर कैलकुलेटर मे आप बकाया लोन, ब्याज दर व बकाया अवधि डालने के बाद आपको लोन कि अवधि बदलनी है या ईएमआई इससे चुनने के बाद आपको स्पष्ट परिणाम दिखाता है। हालांकि यह परिणाम अनुमानित होते है।

लोन प्रीपेमेंट से ब्याज पर क्या असर पड़ता है?

लोन प्रीपेमेंट का सबसे बड़ा फायदा ब्याज में होने वाली संभावित बचत है।
लोन पर ब्याज बकाया मूलधन के आधार पर जुड़ता है। जब मूलधन कम होता है, तो भविष्य में लगने वाले ब्याज की राशि भी कम हो सकती है।
मान लीजिए आपके होम लोन की बड़ी राशि अभी बाकी है और लोन समाप्त होने में 15 वर्ष बचे हैं। यदि आप आज एक बड़ी राशि का प्रीपेमेंट करते हैं, तो अगले 15 वर्षों के दौरान कम मूलधन पर ब्याज की गणना होगी।

इसी कारण लंबी अवधि वाले लोन में प्रीपेमेंट से ब्याज की अच्छी बचत हो सकती है।
होम लोन संबंधी बैंक जानकारी में भी शुरुआती चरण में प्रीपेमेंट को ब्याज बचत के लिए महत्वपूर्ण बताया गया है, क्योंकि लोन के शुरुआती हिस्से में EMI का ब्याज वाला भाग अधिक हो सकता है।

उदाहरण से समझें प्रीपेमेंट का असर
मान लीजिए किसी व्यक्ति के लोन की स्थिति इस प्रकार है:

जानकारीउदाहरण
बकाया लोन₹10,00,000
ब्याज दर10% वार्षिक
बची हुई अवधि5 वर्ष
प्रीपेमेंट राशि₹2,00,000
प्रीपेमेंट का समयवर्तमान में

अब व्यक्ति ₹2 लाख का प्रीपेमेंट करता है।
यदि यह राशि मूलधन में समायोजित होती है, तो बकाया मूलधन ₹10 लाख से घटकर लगभग ₹8 लाख रह सकता है।
इसके बाद दो स्थितियां बन सकती हैं।
पहली स्थिति: बैंक EMI कम कर दे और अवधि लगभग 5 वर्ष रखे।
दूसरी स्थिति: EMI पहले जैसी रहे और लोन अवधि कम हो जाए।

दूसरी स्थिति में लोन जल्दी समाप्त होने और कुल ब्याज में अधिक बचत होने की संभावना रहती है।
यह केवल समझाने के लिए उदाहरण है। वास्तविक परिणाम जानने के लिए ब्याज दर, बची हुई EMI, प्रीपेमेंट राशि और बैंक के नियमों के आधार पर गणना करना जरूरी है।

लोन के शुरुआती समय में प्रीपेमेंट अधिक फायदेमंद क्यों हो सकता है?

रिड्यूसिंग इंटरेस्ट रेट (Reducing Interest Rate) के दौरान लोन की EMI शुरू होने के शुरुआती समय में भुगतान का बड़ा हिस्सा ब्याज की ओर जाता है। जैसे-जैसे लोन आगे बढ़ता है, EMI में मूलधन का हिस्सा बढ़ता जाता है।
इसलिए यदि आप लोन के शुरुआती वर्षों में मूलधन का बड़ा हिस्सा कम कर देते हैं, तो भविष्य में लंबे समय तक कम बकाया राशि पर ब्याज लगेगा।

मान लीजिए 20 वर्ष के होम लोन में आपने तीसरे वर्ष में ₹2 लाख का प्रीपेमेंट किया। इसका असर बाकी लंबी अवधि के ब्याज पर पड़ सकता है।
वहीं, यदि यही ₹2 लाख आप लोन समाप्त होने से कुछ महीने पहले जमा करते हैं, तो ब्याज मे बचत सीमित हो सकती है क्योंकि अधिकांश ब्याज पहले ही चुकाया जा चुका होगा।
इसी कारण प्रीपेमेंट करने का समय बहुत महत्वपूर्ण है।

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क्या हर महीने अतिरिक्त EMI देना भी प्रीपेमेंट जैसा फायदा दे सकता है?

यदि बैंक की शर्तें अनुमति देती हैं और अतिरिक्त राशि मूलधन में समायोजित होती है, तो नियमित EMI से अधिक भुगतान करना भी मूलधन जल्दी कम करने में मदद कर सकता है।
कुछ लोग वर्ष में एक अतिरिक्त EMI जमा करते हैं। कुछ लोग बोनस मिलने पर बड़ी राशि जमा करते हैं। वहीं कुछ लोग हर कुछ महीनों में छोटी-छोटी रकम का प्रीपेमेंट करते हैं।

कौन सा तरीका बेहतर है, यह आपकी आय और बैंक की शर्तों पर निर्भर करता है।
यदि आपकी आय नियमित है लेकिन एक साथ बड़ी राशि उपलब्ध नहीं होती, तो समय-समय पर छोटी राशि का आंशिक भुगतान उपयोगी हो सकता है।
लेकिन अतिरिक्त भुगतान करने से पहले बैंक से यह जरूर पूछें कि राशि मूलधन में समायोजित होगी या केवल आने वाली EMI के अग्रिम भुगतान के रूप में रखी जाएगी। और इसके लिए अतिरिक्त शुल्क तो लागू नहीं होगा।

किन लोन में प्रीपेमेंट किया जा सकता है?

कई प्रकार के लोन में आंशिक या पूर्ण प्रीपेमेंट की सुविधा उपलब्ध हो सकती है। इसमें होम लोन, पर्सनल लोन, कार लोन, एजुकेशन लोन और बिजनेस लोन शामिल हो सकते हैं।
हालांकि सभी बैंकों और वित्तीय संस्थाओं की शर्तें समान नहीं होतीं।

किसी बैंक में आंशिक प्रीपेमेंट की न्यूनतम राशि तय हो सकती है। कुछ लोन में निश्चित EMI चुकाने के बाद ही पार्ट-पेमेंट की अनुमति मिल सकती है। कुछ मामलों में एक वर्ष में प्रीपेमेंट की संख्या या राशि पर शर्त हो सकती है।
इसलिए किसी दूसरे व्यक्ति के लोन नियम देखकर अपने लोन के बारे में फैसला न करें। अपने लोन समझौते और बैंक की वर्तमान प्रीपेमेंट नीति की अवश्य जांच करें।

क्या लोन प्रीपेमेंट पर चार्ज लगता है?

हां, कुछ लोन में प्रीपेमेंट या फोरक्लोजर शुल्क लग सकता है। शुल्क लोन के प्रकार, ब्याज दर की प्रकृति और बैंक या वित्तीय संस्था की नीति पर निर्भर करता है।

उदाहरण के लिए, कुछ लोन में बकाया मूलधन पर तय प्रतिशत के आधार पर प्रीपेमेंट या फोरक्लोजर शुल्क हो सकता है। वहीं कुछ बैंक लोन को समयपूर्व बंद करने के शुल्क EMI भुगतान की अवधि के आधार पर भी होते हैं।

इसलिए यह मान लेना सही नहीं है कि हर लोन पर प्रीपेमेंट मुफ्त होगा या हर लोन पर शुल्क लगेगा।
प्रीपेमेंट से पहले अपने बैंक से लिखित या आधिकारिक माध्यम से लागू शुल्क की जानकारी लेना चाहिए।

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प्रीपेमेंट चार्ज होने पर भी लोन जल्दी चुकाना चाहिए?

इसका जवाब प्रीपेमेंट से होने वाली कुल बचत पर निर्भर करता है।
मान लीजिए प्रीपेमेंट करने पर ₹5,000 का शुल्क लग रहा है, लेकिन इससे भविष्य के ब्याज में ₹70,000 की संभावित बचत हो रही है। ऐसी स्थिति में प्रीपेमेंट उपयोगी हो सकता है।
वहीं, यदि शुल्क ₹10,000 है और ब्याज बचत केवल ₹12,000 है, तो आपको निर्णय लेने से पहले अन्य विकल्पों की तुलना करनी चाहिए।
इसीलिए केवल प्रीपेमेंट चार्ज देखकर फैसला न करें। कुल ब्याज बचत में से शुल्क और अन्य लागू खर्च घटाकर वास्तविक लाभ को समझें।

किन लोगों के लिए लोन प्रीपेमेंट फायदेमंद हो सकता है?

प्रीपेमेंट उन लोगों के लिए उपयोगी हो सकता है जिनके पास नियमित खर्च और आपातकालीन बचत के बाद अतिरिक्त धन उपलब्ध है।
विशेष रूप से अधिक ब्याज वाले लोन को जल्दी कम करने से भविष्य की बड़ी ब्याज लागत घट सकती है।

यदि आपके पास पर्सनल लोन जैसा अधिक ब्याज वाला कर्ज है और दूसरी तरफ अतिरिक्त पैसा कम रिटर्न वाले खाते में पड़ा है, तो दोनों की तुलना करना उपयोगी हो सकता है।

इसी तरह लंबी अवधि के होम लोन में शुरुआती वर्षों के दौरान अतिरिक्त भुगतान करने से कुल ब्याज में काफी अंतर पड़ सकता है।
लेकिन प्रीपेमेंट तभी करें जब इससे आपकी रोजमर्रा की आर्थिक स्थिति कमजोर न हो।

कब लोन प्रीपेमेंट नहीं करना चाहिए?

  • हर बार अतिरिक्त पैसा मिलते ही पूरा पैसा लोन में जमा करना सही नहीं है।
  • यदि आपके पास आपातकालीन खर्च के लिए पर्याप्त बचत नहीं है, तो पहले आपातकालीन निधि बनाना जरूरी हो सकता है। क्योंकि नौकरी जाने, बीमारी, घर की मरम्मत या किसी अचानक खर्च की स्थिति में नकदी की जरूरत पड़ सकती है।
  • इसी तरह यदि अगले कुछ महीनों में बच्चों की फीस, शादी, घर खरीदने या किसी जरूरी खर्च के लिए पैसे की आवश्यकता है, तो पूरी बचत प्रीपेमेंट में लगाने से बचें।
  • बहुत से बैंको द्वारा प्रीपेमेंट के संबंध में भी भविष्य की नकदी जरूरत, संभावित निवेश अवसर और लोन से जुड़े कर लाभ जैसे पहलुओं पर विचार करने की बात कही गई है।

प्रीपेमेंट करें या पैसा निवेश करें?

यह सवाल बहुत महत्वपूर्ण है।
मान लीजिए आपके लोन की ब्याज दर 12% है और आपके पास ₹1 लाख अतिरिक्त है। यदि आप इस राशि का प्रीपेमेंट करते हैं, तो भविष्य की ब्याज लागत कम हो सकती है।
दूसरी ओर, यदि आप वही पैसा निवेश करते हैं, तो निवेश से मिलने वाला रिटर्न निश्चित नहीं भी हो सकता है।
इसलिए तुलना करते समय केवल संभावित निवेश रिटर्न न देखें। निवेश का जोखिम, टैक्स, समय और लोन की निश्चित ब्याज लागत भी समझें।
यदि अधिक ब्याज वाला कर्ज है, तो उसे कम करना कई स्थितियों में उपयोगी हो सकता है।
कम ब्याज वाले लोन में निवेश और प्रीपेमेंट के बीच निर्णय आपकी जोखिम लेने की क्षमता, वित्तीय लक्ष्य और पैसे की जरूरत पर निर्भर करेगा।

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प्रीपेमेंट से पहले आपातकालीन निधि क्यों जरूरी है?

मान लीजिए आपके बैंक खाते में ₹3 लाख की बचत है और आपके लोन पर ₹8 लाख बकाया है।
आपने पूरा ₹3 लाख लोन में जमा कर दिया।
अगले महीने अचानक नौकरी चली गई या घर में बड़ा खर्च आ गया। अब आपके पास नकदी नहीं है।
ऐसी स्थिति में आपको दोबारा पर्सनल लोन या क्रेडिट कार्ड का सहारा लेना पड़ सकता है। नया कर्ज पुराने लोन से अधिक महंगा भी हो सकता है।
इसलिए अपनी पूरी बचत प्रीपेमेंट में लगाना समझदारी नहीं है।
पहले जरूरी खर्चों और आपातकालीन जरूरतों के लिए पर्याप्त राशि अलग रखें। इसके बाद उपलब्ध अतिरिक्त पैसे से प्रीपेमेंट पर विचार करें।

क्या प्रीपेमेंट से सिबिल स्कोर बढ़ जाता है?

  • केवल लोन प्रीपेमेंट करने से सिबिल स्कोर तुरंत बढ़ना जरूरी नहीं है।
  • आपका क्रेडिट स्कोर कई बातों से प्रभावित होता है। इसमें भुगतान इतिहास, कुल बकाया, क्रेडिट उपयोग और क्रेडिट इतिहास जैसी जानकारी शामिल हो सकती है।
  • प्रीपेमेंट से आपकी कुल देनदारी कम हो सकती है। लेकिन अच्छे क्रेडिट प्रोफाइल के लिए समय पर EMI भुगतान करना भी जरूरी है।
  • यदि आप पूरा लोन समय से पहले बंद करते हैं, तो कुछ समय बाद अपनी क्रेडिट रिपोर्ट की जांच करें और देखें कि लोन खाता सही स्थिति में अपडेट हुआ है या नहीं।

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लोन प्रीपेमेंट कैसे करें?

प्रीपेमेंट की प्रक्रिया बैंक और वित्तीय संस्था के अनुसार अलग हो सकती है। कई बैंक ऑनलाइन माध्यम से भुगतान की सुविधा देते हैं, जबकि कुछ मामलों में शाखा या ग्राहक सेवा से संपर्क करना पड़ सकता है।

सामान्य तौर पर पहले अपने लोन खाते की बकाया राशि और प्रीपेमेंट नियम समझे। इसके बाद बैंक से लागू शुल्क और न्यूनतम प्रीपेमेंट राशि की जानकारी भी लें।

यदि आप आंशिक भुगतान कर रहे हैं, तो यह भी तय करें कि आप EMI कम करवाना चाहते हैं या लोन अवधि कम करना चाहते है।

भुगतान पूरा होने के बाद नई पुनर्भुगतान अनुसूची जरूर लें। इससे आपको नई EMI, बची हुई अवधि और बकाया राशि समझने में मदद मिलेगी।

प्रीपेमेंट करते समय इन गलतियों से बचें

  • पूरी आपातकालीन बचत लोन में जमा न करें।
  • बैंक के शुल्क जांचे बिना भुगतान न करें।
  • यह न मानें कि हर लोन पर प्रीपेमेंट मुफ्त है।
  • अतिरिक्त भुगतान को अग्रिम EMI समझकर न छोड़ें; भुगतान के बाद मूलधन समायोजन की पुष्टि करें।
  • प्रीपेमेंट के बाद नई भुगतान अनुसूची जरूर देखें।
  • EMI कम और अवधि कम करने के विकल्प की तुलना किए बिना फैसला न करें।
  • केवल कर्ज जल्दी खत्म करने के उत्साह में अन्य जरूरी वित्तीय लक्ष्य न रोकें।
  • लोन बंद होने पर क्लोजर दस्तावेज लेना न भूलें।

कर्ज कम करने के साथ पैसे की सही योजना भी जरूरी है

लोन जल्दी चुकाना अच्छी वित्तीय योजना का एक हिस्सा हो सकता है, लेकिन केवल कर्ज समाप्त करना ही आर्थिक स्वतंत्रता नहीं है। आय, बचत, आपातकालीन निधि और निवेश को भी साथ लेकर चलना जरूरी है।

यदि आप पैसे को बेहतर तरीके से संभालना, कर्ज से बचना और निवेश की शुरुआती बातें आसान भाषा में समझना चाहते हैं, तो मेरी ईबुक “फाइनेंशियल फ्रीडम कैसे पाएं – नौकरी से निवेश तक का सफर” भी पढ़ सकते हैं। ईबुक के बारे में Fincoloan.com पर उपलब्ध जानकारी में पैसे, बचत, निवेश और कर्ज से जुड़े विषय शामिल हैं।

लोन प्रीपेमेंट करना सही है या नहीं?

हां, लोन प्रीपेमेंट सही हो सकता है यदि आपके पास जरूरी खर्च और आपातकालीन बचत के बाद अतिरिक्त पैसा उपलब्ध है और प्रीपेमेंट से होने वाली ब्याज बचत लागू शुल्क से अधिक है।

अधिक ब्याज वाले लोन और लंबी बची हुई अवधि वाले लोन में प्रीपेमेंट का असर अधिक दिखाई दे सकता है।

लेकिन यदि प्रीपेमेंट के लिए आपको अपनी पूरी बचत खत्म करनी पड़ रही है, तो प्रीपेमेंट से पहले एक बार अपनी वित्तीय स्थिति पर विचार जरूर करें।

सबसे अच्छा तरीका है कि पहले बकाया लोन, ब्याज दर, बची हुई अवधि, प्रीपेमेंट राशि और शुल्क के आधार पर गणना करें। इसके बाद EMI कम करने और अवधि कम करने के दोनों विकल्पों की तुलना करें।

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निष्कर्ष (Conclusion)

लोन प्रीपेमेंट का अर्थ नियमित EMI के अलावा अतिरिक्त राशि देकर लोन का कुछ हिस्सा या पूरा बकाया समय से पहले चुकाना है। प्रीपेमेंट से बकाया मूलधन कम हो सकता है और इसका सीधा असर भविष्य के ब्याज पर पड़ता है।

आंशिक प्रीपेमेंट के बाद आप बैंक की शर्तों के अनुसार EMI कम कर सकते हैं या मौजूदा EMI जारी रखकर लोन अवधि घटा सकते हैं। यदि आपका उद्देश्य हर महीने का आर्थिक दबाव कम करना है, तो EMI कम करना उपयोगी हो सकता है। वहीं यदि आप जल्दी कर्ज मुक्त होना और अधिक ब्याज बचाना चाहते हैं, तो अवधि कम करने का विकल्प अधिक उपयोगी हो सकता है।

किसी भी राशि का प्रीपेमेंट करने से पहले शुल्क, आपातकालीन बचत और भविष्य की जरूरतों को जरूर देखें। साथ ही में अपने लोन की जानकारी दर्ज करके संभावित ब्याज बचत और अवधि में कमी का अनुमान लगा सकते हैं।

सही समय पर और सही गणना के साथ किया गया प्रीपेमेंट लोन की कुल लागत कम करने में मदद कर सकता है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)

प्रश्न 1: लोन प्रीपेमेंट क्या होता है?

उत्तर: नियमित EMI के अलावा अतिरिक्त राशि देकर लोन का कुछ हिस्सा या पूरा बकाया समय से पहले चुकाने को लोन प्रीपेमेंट कहा जाता है।

प्रश्न 2: क्या प्रीपेमेंट करने से EMI कम हो जाती है?

उत्तर: हां, आंशिक प्रीपेमेंट के बाद बकाया मूलधन कम होने पर EMI कम हो सकती है। यह बैंक की शर्तों और आपके चुने गए विकल्प पर निर्भर करता है।

प्रश्न 3: क्या प्रीपेमेंट से लोन अवधि कम होती है?

उत्तर: हां, यदि प्रीपेमेंट के बाद आप मौजूदा EMI जारी रखते हैं, तो लोन अवधि कम हो सकती है।

प्रश्न 4: EMI कम करना बेहतर है या अवधि कम करना?

उत्तर: यदि मासिक बजट पर दबाव है तो EMI कम करना उपयोगी हो सकता है। यदि मौजूदा EMI आसानी से चुका सकते हैं और अधिक ब्याज बचाना चाहते हैं, तो अवधि कम करना अधिक उपयोगी हो सकता है।

प्रश्न 5: क्या लोन प्रीपेमेंट से ब्याज बचता है?

उत्तर: हां, प्रीपेमेंट से बकाया मूलधन कम होता है। इसके कारण भविष्य में लगने वाला कुल ब्याज कम हो सकता है।

प्रश्न 6: प्रीपेमेंट कब करना अधिक फायदेमंद होता है?

उत्तर: आमतौर पर लोन के शुरुआती हिस्से में प्रीपेमेंट करने से अधिक ब्याज बच सकता है क्योंकि उस समय भविष्य की लंबी लोन अवधि बाकी होती है।

प्रश्न 7: क्या पर्सनल लोन का प्रीपेमेंट किया जा सकता है?

उत्तर: हां, कई बैंक और वित्तीय संस्थाएं पर्सनल लोन में आंशिक या पूर्ण प्रीपेमेंट की सुविधा देती हैं। नियम और शुल्क अलग-अलग हो सकते हैं।

प्रश्न 8: क्या होम लोन प्रीपेमेंट पर शुल्क लगता है?

उत्तर: यह ब्याज दर की प्रकृति और लागू नियमों पर निर्भर करता है। व्यक्तिगत उधारकर्ताओं के फ्लोटिंग रेट टर्म लोन के संबंध में RBI ने प्रीपेमेंट पेनल्टी पर निर्देश जारी किए हैं। अपने बैंक की वर्तमान शर्तें जरूर जांचें।

प्रश्न 9: क्या बोनस मिलने पर लोन का प्रीपेमेंट करना चाहिए?

उत्तर: हां, यदि आपके पास पर्याप्त आपातकालीन बचत है और बोनस की राशि निकट भविष्य के जरूरी खर्च के लिए नहीं चाहिए, तो प्रीपेमेंट पर विचार कर सकते हैं।

प्रश्न 10: क्या पूरी बचत लोन प्रीपेमेंट में लगानी चाहिए?

उत्तर: नहीं। आपातकालीन जरूरतों और जरूरी खर्चों के लिए पर्याप्त पैसा अलग रखने के बाद ही अतिरिक्त राशि से प्रीपेमेंट करना चाहिए।

प्रश्न 11: प्रीपेमेंट के बाद क्या बैंक नई EMI बताएगा?

उत्तर: यदि EMI में बदलाव होता है, तो बैंक नई भुगतान अनुसूची जारी कर सकता है। प्रीपेमेंट के बाद संशोधित लोन विवरण जरूर लें।

प्रश्न 12: प्रीपेमेंट से सिबिल स्कोर तुरंत बढ़ता है?

उत्तर: नहीं, केवल प्रीपेमेंट से सिबिल स्कोर तुरंत बढ़ना जरूरी नहीं है। समय पर EMI भुगतान और संपूर्ण क्रेडिट व्यवहार भी महत्वपूर्ण है।

प्रश्न 13: प्रीपेमेंट से कितना ब्याज बच सकता है?

उत्तर: ब्याज बचत बकाया राशि, ब्याज दर, बची हुई अवधि, प्रीपेमेंट राशि और प्रीपेमेंट के समय पर निर्भर करती है। सही अनुमान के लिए लोन प्री-पेमेंट कैलकुलेटर का उपयोग करें।

प्रश्न 14: क्या छोटी राशि का भी प्रीपेमेंट किया जा सकता है?

उत्तर: हां, हो सकता है। न्यूनतम प्रीपेमेंट राशि बैंक और लोन की शर्तों पर निर्भर करती है। भुगतान से पहले अपने बैंक की नीति जांचें।

प्रश्न 15: लोन बंद करने के बाद कौन सा दस्तावेज लेना चाहिए?

उत्तर: पूरा लोन बंद करने के बाद बैंक से लोन क्लोजर प्रमाणपत्र या नो ड्यूज प्रमाणपत्र जरूर लें और बाद में अपनी क्रेडिट रिपोर्ट में लोन खाते की स्थिति भी जांचें।

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प्रवीन कुमार

प्रवीन कुमार एक फाइनेंस ब्लॉगर और कंटेंट राइटर हैं, जो पिछले 5 वर्षों से लोन, बैंकिंग, ईएमआई, क्रेडिट स्कोर, SIP, म्यूचुअल फंड, निवेश और वित्तीय जागरूकता जैसे विषयों पर लेख लिख रहे हैं। वे Fincoloan.com और Paisawale.in ब्लॉग के संस्थापक हैं। इन्होंने B.Ed तथा M.Sc. की शिक्षा प्राप्त की है और ‘फाइनेंशियल फ्रीडम कैसे पाएं: नौकरी से निवेश तक का सफर’ नामक हिंदी ई-बुक भी लिखी है।