
देशभर में होम लोन, कार लोन और पर्सनल लोन की EMI भर रहे करोड़ों लोगों की नजर अब भारतीय रिजर्व बैंक यानी RBI की अगली मॉनेटरी पॉलिसी पर टिकी हुई है। ऐसे समय में स्टेट बैंक ऑफ इंडिया की रिसर्च रिपोर्ट ने रेपो रेट को लेकर बड़ा संकेत दिया है। रिपोर्ट के अनुसार, मौजूदा परिस्थितियों में RBI को रेपो रेट बढ़ाने की जरूरत नहीं पड़ सकती। इससे आम लोगों को महंगे कर्ज से राहत मिलने की उम्मीद बनी हुई है।
दरअसल, पिछले कुछ समय से अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों और वैश्विक अनिश्चितताओं के कारण रुपये पर लगातार दबाव देखा जा रहा है। ऐसे में यह सवाल उठ रहा था कि क्या RBI रुपये को मजबूत करने के लिए रेपो रेट बढ़ा सकता है। हालांकि SBI रिसर्च की रिपोर्ट में साफ कहा गया है कि केवल रुपये पर दबाव की वजह से ब्याज दरें बढ़ाना जरूरी नहीं है।
रिपोर्ट के मुताबिक RBI के पास ऐसे कई दूसरे विकल्प मौजूद हैं जिनके जरिए बाजार की स्थिति को संभाला जा सकता है। इसमें शॉर्ट टर्म ब्याज दरों से जुड़े उपाय और लिक्विडिटी मैनेजमेंट जैसे कदम शामिल हैं। SBI रिसर्च का मानना है कि RBI डेटा आधारित रणनीति अपनाते हुए फिलहाल ब्याज दरों को स्थिर रख सकता है।
रिपोर्ट में साल 2013 का उदाहरण भी दिया गया है। उस समय रुपये में तेज गिरावट को रोकने के लिए RBI ने मार्जिनल स्टैंडिंग फैसिलिटी यानी MSF रेट में 200 बेसिस पॉइंट की बढ़ोतरी की थी। हालांकि रेपो रेट को उसी स्तर पर रखा गया था। इससे यह संकेत मिलता है कि केंद्रीय बैंक बिना रेपो रेट बढ़ाए भी बाजार में स्थिरता लाने के उपाय कर सकता है।
SBI रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि RBI “ऑपरेशन ट्विस्ट” जैसे टूल्स का इस्तेमाल कर सकता है। इस प्रक्रिया में शॉर्ट टर्म ब्याज दरों को ऊपर रखा जाता है, जबकि लॉन्ग टर्म दरों को नीचे बनाए रखने की कोशिश की जाती है। इससे रुपये को सपोर्ट मिल सकता है और लंबी अवधि के कर्ज की लागत पर ज्यादा असर नहीं पड़ता।
अगर RBI वास्तव में रेपो रेट को स्थिर रखता है तो इसका सीधा फायदा होम लोन और अन्य लंबी अवधि के लिए लोन लेने वालों को मिल सकता है। इससे EMI में तत्काल बढ़ोतरी की आशंका कम रहेगी और बैंक भी ब्याज दरों में बड़ा बदलाव करने से बच सकते हैं। खासकर उन लोगों के लिए यह राहत की खबर हो सकती है जो पहले से महंगी EMI का बोझ उठा रहे हैं।
रिपोर्ट में भारतीय अर्थव्यवस्था को लेकर भी सकारात्मक अनुमान जताया गया है। SBI रिसर्च के अनुसार वित्त वर्ष 2025-26 की चौथी तिमाही में देश की वास्तविक GDP वृद्धि दर लगभग 7.2 प्रतिशत रह सकती है, जबकि पूरे वित्त वर्ष की विकास दर 7.5 प्रतिशत रहने का अनुमान है।
अब बाजार और आम लोगों की नजर RBI की अगली मॉनेटरी पॉलिसी बैठक पर बनी हुई है। अगर केंद्रीय बैंक ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं करता तो आने वाले समय में लोन लेने वालों को कुछ राहत जरूर मिल सकती है।
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