Home Loan Insurance क्या होता है और क्या होम लोन के साथ बीमा लेना जरूरी है

Home Loan Insurance क्या होता है? क्या होम लोन के साथ बीमा लेना जरूरी है, प्रीमियम और फायदे जानें

घर खरीदने या अपना मकान बनवाने के लिए बड़ी रकम की जरूरत होती है। ज्यादातर लोगों के लिए एक साथ लाखों रुपये खर्च करना आसान नहीं होता, इसलिए वे होम लोन लेते हैं और फिर 10, 20 या 30 साल तक हर महीने EMI जमा करते हैं।

लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि अगर होम लोन लेने वाले व्यक्ति की लोन चुकाने के दौरान मृत्यु हो जाए तो बाकी लोन कौन चुकाएगा? परिवार EMI नहीं भर पाए तो घर तो घर का क्या होगा ? इसी आर्थिक जोखिम को कम करने के लिए Home Loan Insurance या Home Loan Protection Plan लिया जाता है।

बहुत से बैंक और लोन देने वाली कंपनियां होम लोन के समय बीमा लेने का विकल्प भी देती हैं। लेकिन होम लोन लेने के लिए Home Loan Insurance हर मामले में कानूनन अनिवार्य नहीं है। RBI की होम लोन से जुड़ी जानकारी में भी बैंक की शर्तों को ध्यान से पढ़ने और बीमा जैसी शर्तों पर पूरी जानकारी लेने की बात कही गई है।

इस पोस्ट में हम समझेंगे कि होम लोन इंश्योरेंस क्या होता है, यह कैसे काम करता है, कितना प्रीमियम लग सकता है, कौन-कौन से कवर मिलते हैं और होम लोन बीमा लेते समय किन बातों का ध्यान रखना चाहिए।

Home Loan Insurance क्या होता है और क्या होम लोन के साथ बीमा लेना जरूरी है

होम लोन इंश्योरेंस क्या है?

Home Loan Insurance यानी होम लोन का बीमा एक ऐसा बीमा है जो होम लोन की बकाया रकम से जुड़े आर्थिक जोखिम को कवर करता है। इसे कई जगह Home Loan Protection Plan यानी HLPP भी कहा जाता है।

मान लीजिए किसी व्यक्ति ने ₹40 लाख का होम लोन लिया है। कुछ साल तक EMI जमा करने के बाद उसकी मृत्यु हो जाती है। यदि परिवार की आमदनी इतनी नहीं है कि वह बाकी EMI जमा कर सके तो लोन चुकाना मुश्किल हो सकता है।

ऐसी स्थिति में होम लोन बीमा पॉलिसी की शर्तों के अनुसार बकाया लोन की रकम का भुगतान बीमा कंपनी करती है। इससे परिवार पर अचानक लाखों रुपये का लोन चुकाने का दबाव नहीं होता है।

कुछ पॉलिसी में मृत्यु के अलावा पूर्ण विकलांगता या गंभीर बीमारी जैसे अतिरिक्त कवर भी जोड़े जा सकते हैं। नौकरी जाने का कवर भी कुछ खास योजनाओं या अतिरिक्त कवर में मिलता है। हर होम लोन इंश्योरेंस पॉलिसी में ये सभी फायदे अपने आप शामिल नहीं होते हैं।

जानकारीविवरण
पॉलिसी का नामHome Loan Insurance / Home Loan Protection Plan
मुख्य उद्देश्यहोम लोन की बकाया रकम को कवर करना
मुख्य कवरपॉलिसी की शर्तों के अनुसार मृत्यु
अतिरिक्त कवरगंभीर बीमारी, विकलांगता, नौकरी जानेआदि
कवर की रकमबकाया लोन या तय बीमित रकम
अवधिआमतौर पर लोन की अवधि के अनुसार
प्रीमियमउम्र, लोन रकम, अवधि और स्वास्थ्य पर निर्भर
क्या लेना अनिवार्य है?हर होम लोन के लिए कानूनन अनिवार्य नहीं

क्या होम लोन के साथ बीमा लेना जरूरी है?

हर होम लोन के साथ Home Loan Insurance लेना जरूरी नहीं है।

कई बार बैंक या हाउसिंग फाइनेंस कंपनी होम लोन लेते समय बीमा के बारे में बताती है। कुछ मामलों में ग्राहक को ऐसा लग सकता है कि बीमा लिए बिना लोन नहीं मिलेगा।

इसलिए लोन लेते समय बैंक से साफ पूछें कि बीमा वैकल्पिक है या लोन की किसी खास शर्त का हिस्सा है। साथ ही बीमा कंपनी, पॉलिसी का नाम, प्रीमियम और मिलने वाला कवर के बारे मे लिखित रूप में देखें।

सिर्फ बैंक कर्मचारी या एजेंट के कहने पर तुरंत पॉलिसी न लें। पहले पॉलिसी के फायदे और खर्च को समझें।

होम लोन इंश्योरेंस कैसे काम करता है?

इसका काम समझना काफी आसान है। मान लीजिए आपने ₹40 लाख का होम लोन 20 साल के लिए लिया। आपने कुछ साल तक EMI जमा की और अब ₹34 लाख लोन बाकी है।

यदि पॉलिसी में कवर होने वाली स्थिति में बीमित व्यक्ति की मृत्यु हो जाती है तो बीमा कंपनी पॉलिसी की शर्तों के अनुसार बकाया लोन की रकम का भुगतान करती है।

यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि हर पॉलिसी में परिवार को सीधे पूरी बीमित रकम मिलना जरूरी नहीं है। Credit Linked या Loan Protection Plan में भुगतान की प्रक्रिया पॉलिसी और बैंक के साथ किए गए समझौते के अनुसार होती है।

इसलिए पॉलिसी खरीदने से पहले यह जरूर देखें कि दावा मिलने पर पैसा बैंक को मिलेगा या नॉमिनी को। लेकिन अधिकतर मामले मे पैसा सीधे तौर पर लोन देने वाली बैंक या कंपनी को ही मिलता है।

होम लोन इंश्योरेंस पॉलिसी कितने प्रकार की होती है?

कवर की रकम के आधार पर होम लोन बीमा को मुख्य रूप से दो तरह से समझा जा सकता है।

1. Reducing Cover Home Loan Insurance

Reducing Cover Policy में समय के साथ बीमित रकम कम होती जाती है।

होम लोन की EMI जमा करने पर बकाया रकम धीरे-धीरे कम होती है। इसी के अनुसार बीमा कवर भी घट सकता है।

उदाहरण के लिए आपने ₹40 लाख का होम लोन लिया। पांच साल बाद आपके लोन की बकाया रकम ₹35 लाख है। यदि उस समय पॉलिसी में कवर होने वाली स्थिति में मृत्यु होती है तो योजना की शर्तों के अनुसार लगभग बकाया लोन से जुड़ा कवर लागू होगा। इस तरह की पॉलिसी का मुख्य उद्देश्य बाकी होम लोन चुकाना होता है।

2. Fixed Cover Home Loan Insurance

Fixed Cover Policy में बीमित रकम तय रहती है। मान लीजिए ₹40 लाख का कवर लिया गया है। पॉलिसी की अवधि के दौरान बीमित रकम तय शर्तों के अनुसार ₹40 लाख ही रहती है।

हालांकि वास्तविक भुगतान, नॉमिनी को मिलने वाली रकम और बैंक के अधिकार पॉलिसी के नियमों पर निर्भर करते हैं।

Fixed Cover में कवर लंबे समय तक अधिक रहने के कारण इसका प्रीमियम Reducing Cover के मुकाबले ज्यादा हो सकता है।

यह कितने समय के लिए होता है?

Home Loan Insurance की अवधि आमतौर पर होम लोन की अवधि को ध्यान में रखकर तय की जाती है।

यदि आपने 20 साल का होम लोन लिया है तो बीमा कवर भी 20 साल के लिए लिया जा सकता है। इसी तरह 25 साल के लोन के लिए 25 साल की अवधि वाला कवर चुना जा सकता है।

पॉलिसी लेते समय यह देखें कि बीमा की अवधि आपके पूरे लोन को कवर कर रही है या लोन खत्म होने से पहले ही पॉलिसी समाप्त हो जाएगी।

यदि आप अपने होम लोन की EMI और कुल ब्याज का सही हिसाब समझना चाहते हैं तो Loan EMI Calculator का इस्तेमाल कर सकते हैं।

इसे भी पढ़ें- 30 लाख के होम लोन की 15 साल की EMI कितनी होगी?

इंश्योरेंस का प्रीमियम कितना होता है?

होम लोन इंश्योरेंस का कोई एक तय प्रीमियम नहीं होता। बीमा कंपनी कई बातों को देखकर प्रीमियम तय करती है।

  1. लोन की रकम: ₹20 लाख के लोन और ₹1 करोड़ के लोन का बीमा खर्च एक जैसा नहीं होगा। ज्यादा कवर पर प्रीमियम भी अधिक रहता है।
  2. लोन की अवधि: लंबे समय तक कवर लेने पर बीमा का खर्च बढ़ सकता है। 10 साल और 25 साल की पॉलिसी के प्रीमियम में अंतर रहेगा।
  3. बीमित व्यक्ति की उम्र: कम उम्र में बीमा लेने पर प्रीमियम आमतौर पर कम रहता है। उम्र बढ़ने के साथ जोखिम और प्रीमियम बढ़ सकता है।
  4. स्वास्थ्य की जानकारी: पहले से मौजूद बीमारी, स्वास्थ्य की स्थिति और मेडिकल जांच का असर प्रीमियम पर पड़ सकता है।
  5. कवर का प्रकार: सिर्फ मृत्यु कवर और मृत्यु के साथ गंभीर बीमारी या विकलांगता कवर वाली पॉलिसी का प्रीमियम अलग होगा।
  6. धूम्रपान की आदत: कई जीवन बीमा योजनाओं में धूम्रपान करने वाले व्यक्ति का प्रीमियम अधिक रहता है।

₹40 लाख के होम लोन के बीमा का खर्च कैसे समझें?

मान लीजिए आपने ₹40 लाख का होम लोन 20 साल के लिए 8.5% सालाना ब्याज दर पर लिया है।

जानकारीरकम
होम लोन₹40,00,000
अवधि20 साल
ब्याज दर8.5% सालाना
अनुमानित EMIलगभग ₹34,713
कुल किस्तें240

अब मान लेते हैं कि बीमा कंपनी ने Home Loan Protection Plan के लिए ₹1 लाख का एकमुश्त प्रीमियम बताया है। ध्यान रखें यह सिर्फ गणना समझाने का उदाहरण है, वास्तविक प्रीमियम नहीं।

यदि आप ₹1 लाख अपनी जेब से जमा करते हैं तो होम लोन ₹40 लाख ही रहेगा।

लेकिन यदि ₹1 लाख का बीमा प्रीमियम लोन में जोड़ दिया जाता है तो कुल फाइनेंस की गई रकम ₹41 लाख हो सकती है। 8.5% ब्याज और 20 साल की अवधि पर ₹1 लाख अतिरिक्त फाइनेंस होने से EMI में लगभग ₹868 प्रति महीने का अंतर पड़ सकता है।

यानी बीमा का ₹1 लाख प्रीमियम लोन में जोड़ने पर आप सिर्फ ₹1 लाख नहीं चुकाते। उस रकम पर लोन का ब्याज भी देना पड़ता है।

यही कारण है कि बीमा का प्रीमियम लोन में जोड़ने से पहले कुल भुगतान का हिसाब जरूर करना चाहिए।

प्रीमियम कैसे जमा किया जा सकता है?

होम लोन बीमा का प्रीमियम जमा करने का तरीका पॉलिसी पर निर्भर करता है।

एकमुश्त प्रीमियम

इसमें पॉलिसी लेते समय पूरा प्रीमियम एक साथ जमा किया जाता है। इसके बाद तय पॉलिसी अवधि के लिए अलग-अलग किस्त जमा करने की जरूरत नहीं रहती।

नियमित प्रीमियम

कुछ बीमा योजनाओं में सालाना या तय समय पर प्रीमियम जमा करने का विकल्प मिलता है। पॉलिसी चालू रखने के लिए समय पर प्रीमियम जमा करना जरूरी होता है।

प्रीमियम को होम लोन में जोड़ना

कई मामलों में बैंक बीमा के एकमुश्त प्रीमियम को लोन की रकम में जोड़ने का विकल्प देता है।

यह तरीका शुरुआत में आसान लगता है क्योंकि अपनी जेब से बड़ी रकम नहीं देनी पड़ती। लेकिन प्रीमियम की रकम पर भी लोन का ब्याज लगता है, जिससे कुल खर्च बढ़ जाता है।

होम लोन लेते समय सिर्फ EMI ही नहीं बल्कि प्रोसेसिंग फीस और दूसरे खर्च भी समझना जरूरी है। इसके लिए आप Home Loan लेते समय कौन-कौन से Charges लगते हैं? पोस्ट पढ़ सकते हैं।

होम लोन इंश्योरेंस कहां से लें?

आप बैंक के साथ मिलने वाली बीमा योजना को ही लेने के लिए हर स्थिति में मजबूर नहीं हैं। पॉलिसी खरीदने से पहले अलग-अलग बीमा योजनाओं की तुलना करें।

इन बातों की तुलना जरूर करें:

  • बीमित रकम कितनी है
  • कवर घटता है या तय रहता है
  • मृत्यु कवर की शर्तें क्या हैं
  • गंभीर बीमारी कवर शामिल है या नहीं
  • विकलांगता कवर मिलता है या नहीं
  • पॉलिसी में कौन-कौन से Exclusions यानी ऐसी स्थितियां हैं जिनमें दावा नहीं मिलेगा
  • लोन ट्रांसफर करने पर पॉलिसी का क्या होगा
  • समय से पहले लोन चुकाने पर कवर जारी रहेगा या नहीं
  • दावा मिलने पर भुगतान बैंक को होगा या नॉमिनी को

सिर्फ कम प्रीमियम देखकर पॉलिसी न चुनें। कम प्रीमियम वाली पॉलिसी का कवर भी सीमित हो सकता है।

होम लोन इंश्योरेंस के फायदे

Home Loan Protection Plan लेने के कई फायदे हैं।

  • बकाया होम लोन का जोखिम कम होता है।
  • बीमित व्यक्ति की मृत्यु के बाद परिवार पर EMI का दबाव कम हो सकता है।
  • परिवार को घर बचाए रखने में आर्थिक मदद मिलती है।
  • कुछ पॉलिसी में गंभीर बीमारी और पूर्ण विकलांगता का अतिरिक्त कवर मिलता है।
  • लोन की लंबी अवधि के दौरान परिवार को आर्थिक सुरक्षा मिलती है।
  • एकमुश्त प्रीमियम वाली पॉलिसी में हर साल पॉलिसी रिन्यू कराने की जरूरत नहीं रहती।
  • पॉलिसी और मौजूदा टैक्स नियमों के अनुसार जीवन बीमा प्रीमियम पर Section 80C का लाभ मिल सकता है।

Home Loan Insurance पर टैक्स छूट मिलती है?

Home Loan Protection Plan जीवन बीमा से जुड़ी योग्य पॉलिसी होने पर प्रीमियम पर Income Tax Act के Section 80C के तहत टैक्स कटौती का लाभ मिल सकता है। Section 80C की कुल सीमा ₹1.5 लाख है और इसमें दूसरे योग्य निवेश व भुगतान भी शामिल होते हैं।

लेकिन यहां एक जरूरी बात है। प्रीमियम किसने जमा किया, पॉलिसी किस प्रकार की है और प्रीमियम को लोन में फाइनेंस किया गया है या नहीं, इससे टैक्स लाभ की स्थिति प्रभावित हो सकती है।

इसलिए सिर्फ बैंक कर्मचारी की बात पर टैक्स छूट मानकर न चलें। पॉलिसी की टैक्स शर्तें और अपने टैक्स नियम जरूर देखें।

किन स्थितियों में Home Loan Insurance का फायदा नहीं मिलेगा?

पुरानी जानकारी में अक्सर लिखा मिलता है कि “स्वाभाविक मृत्यु पर Home Loan Insurance नहीं मिलता।” यह बात हर पॉलिसी के लिए सही नहीं है।

दावा इन कारणों से प्रभावित हो सकता है:

  • आवेदन में स्वास्थ्य की जरूरी जानकारी छिपाना
  • पॉलिसी में शामिल न होने वाली स्थिति में दावा करना
  • गलत जानकारी देकर बीमा लेना
  • पॉलिसी बंद हो जाना
  • तय प्रीमियम जमा न होने से कवर खत्म होना
  • लोन ट्रांसफर के बाद पॉलिसी की शर्तें पूरी न होना

हर पॉलिसी के Exclusions अलग हो सकते हैं। इसलिए Policy Document पढ़ना सबसे जरूरी है।

नौकरी छूटने पर क्या बीमा कंपनी Home Loan EMI भरेगी?

हर Home Loan Insurance Policy नौकरी छूटने पर EMI नहीं भरती है।

कुछ योजनाओं में Job Loss Cover अलग से मिलता है। इसमें भी कई शर्तें हो सकती हैं। उदाहरण के लिए अपनी इच्छा से नौकरी छोड़ना, नौकरी से नियम तोड़ने के कारण निकाला जाना या पहले से नौकरी जाने की जानकारी होना कवर से बाहर रखा जा सकता है।

कितने महीने की EMI मिलेगी, इसकी भी कोई एक तय सीमा सभी पॉलिसियों पर लागू नहीं होती।

Home Loan Insurance और Term Insurance में क्या अंतर है?

होम लोन लेने वाले व्यक्ति को टर्म इंश्योरेंस और होम लोन इंश्योरेंस की तुलना जरूर करनी चाहिए।

Home Loan InsuranceTerm Insurance
मुख्य उद्देश्य लोन को कवर करनापरिवार को जीवन बीमा कवर देना
कवर लोन से जुड़ा हो सकता हैबीमित रकम तय रहती है
Reducing Cover मिल सकता हैआमतौर पर Fixed Life Cover
लोन खत्म होने पर जरूरत कम हो सकती हैपॉलिसी अवधि तक कवर
भुगतान की शर्त बैंक से जुड़ी हो सकती हैदावा राशि नॉमिनी को मिलती है
अतिरिक्त कवर योजना पर निर्भरRiders अलग से जोड़े जा सकते हैं

मान लीजिए आपके ऊपर ₹40 लाख का होम लोन है और आपके पास पहले से पर्याप्त Term Insurance Cover है। ऐसी स्थिति में नया Home Loan Insurance लेने से पहले अपने मौजूदा जीवन बीमा कवर को जरूर देखें।

वहीं यदि आपके पास कोई जीवन बीमा नहीं है और परिवार आपकी आमदनी पर निर्भर है तो सिर्फ होम लोन ही नहीं, परिवार के दूसरे खर्चों को भी ध्यान में रखना जरूरी है।

होम लोन इंश्योरेंस लेते समय इन बातों का ध्यान रखें

  1. बैंक के कहने पर तुरंत बीमा न खरीदें। पॉलिसी का नाम और बीमा कंपनी की जानकारी लें।
  2. यह देखें कि कवर Reducing है या Fixed। सिर्फ “₹40 लाख का बीमा है” सुनकर फैसला न करें।
  3. प्रीमियम लोन में जोड़ने से पहले EMI और कुल ब्याज का हिसाब करें। आप Smart Loan Comparison Calculator या Loan EMI Calculator की मदद से अलग-अलग विकल्प समझ सकते हैं।
  4. Term Insurance से तुलना करें। कई लोगों के लिए पर्याप्त Term Cover परिवार और लोन दोनों की सुरक्षा के लिए ज्यादा उपयोगी हो सकता है।
  5. गंभीर बीमारी, विकलांगता और नौकरी जाने के कवर को अपने आप शामिल न मानें। पॉलिसी में लिखी शर्तें देखें।
  6. होम लोन Balance Transfer करने की योजना है तो पहले बीमा कंपनी से पूछें कि पॉलिसी का क्या होगा।
  7. Claim Process और Nominee की जानकारी समझें। परिवार को भी पॉलिसी के बारे में जरूर बताएं।

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अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

क्या Home Loan Insurance लेना अनिवार्य है?

नहीं, हर होम लोन के साथ Home Loan Insurance लेना कानूनन अनिवार्य नहीं है। बैंक की लोन शर्त और बीमा प्रस्ताव को अलग-अलग समझें।

क्या मृत्यु होने पर पूरा होम लोन माफ हो जाता है?

लोन अपने आप माफ नहीं होता। बीमा पॉलिसी में योग्य दावा होने पर बीमा कंपनी तय कवर के अनुसार भुगतान करती है।

क्या Home Loan Insurance नौकरी छूटने पर EMI भरता है?

हर पॉलिसी नहीं। Job Loss Cover वाली कुछ योजनाओं में तय शर्तों के अनुसार सीमित समय के लिए EMI का कवर मिल सकता है।

Home Loan Insurance का प्रीमियम कितना होता है?

प्रीमियम उम्र, लोन की रकम, अवधि, स्वास्थ्य, कवर और बीमा कंपनी पर निर्भर करता है। सभी ग्राहकों के लिए कोई एक तय प्रतिशत नहीं है।

क्या होम लोन बीमा पर टैक्स छूट मिलती है?

योग्य जीवन बीमा से जुड़ी पॉलिसी के प्रीमियम पर मौजूदा टैक्स नियमों के अनुसार Section 80C का लाभ मिल सकता है। पॉलिसी और प्रीमियम भुगतान का तरीका जरूर देखें।

Home Loan Insurance और Home Insurance एक ही हैं?

नहीं। Home Loan Insurance लोन की बकाया रकम से जुड़े जोखिम को कवर करता है, जबकि Home Insurance घर और सामान को आग, प्राकृतिक आपदा और पॉलिसी में शामिल दूसरे नुकसान से सुरक्षा देता है।
Home Insurance के बारे में विस्तार से जानने के लिए होम इंश्योरेंस क्या होता है? घर का बीमा कैसे कराएं और क्या कवर होता है? पोस्ट पढ़ें।

निष्कर्ष

Home Loan Insurance लंबे समय के होम लोन से जुड़े आर्थिक जोखिम को कम करने का एक तरीका है। लोन लेने वाले व्यक्ति की मृत्यु जैसी मुश्किल स्थिति में योग्य बीमा दावा परिवार पर बकाया होम लोन का दबाव कम कर सकता है।

लेकिन पॉलिसी लेते समय सिर्फ बैंक या एजेंट की बात सुनना सही नहीं है। कवर की रकम, प्रीमियम, Reducing या Fixed Cover, अतिरिक्त कवर, Exclusions और Claim Process जरूर समझें।

साथ ही Home Loan Insurance की तुलना Term Insurance से करें और प्रीमियम को लोन में जोड़ने से पहले अतिरिक्त ब्याज का हिसाब जरूर लगाएं। सही जानकारी के बाद लिया गया बीमा परिवार की आर्थिक सुरक्षा के लिए ज्यादा उपयोगी साबित होता है।

अस्वीकरण: इस पोस्ट में दी गई जानकारी सामान्य जानकारी और शिक्षा के उद्देश्य से है। बीमा कवर, प्रीमियम, टैक्स लाभ और दावा शर्तें पॉलिसी व लागू नियमों के अनुसार अलग हो सकती हैं। पॉलिसी खरीदने से पहले बीमा कंपनी के पॉलिसी दस्तावेज, नियम और शर्तें जरूर पढ़ें।

प्रवीन कुमार

प्रवीन कुमार एक फाइनेंस ब्लॉगर और कंटेंट राइटर हैं, जो पिछले 5 वर्षों से लोन, बैंकिंग, ईएमआई, क्रेडिट स्कोर, SIP, म्यूचुअल फंड, निवेश और वित्तीय जागरूकता जैसे विषयों पर लेख लिख रहे हैं। वे Fincoloan.com और Paisawale.in ब्लॉग के संस्थापक हैं। इन्होंने B.Ed तथा M.Sc. की शिक्षा प्राप्त की है और ‘फाइनेंशियल फ्रीडम कैसे पाएं: नौकरी से निवेश तक का सफर’ नामक हिंदी ई-बुक भी लिखी है।

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