सैलरी के हिसाब से पर्सनल लोन की कोई एक तय रकम नहीं होती। एक जैसी सैलरी पाने वाले दो लोगों को भी अलग लोन राशि मिल सकती है। बैंक आपकी हाथ में आने वाली सैलरी के साथ मौजूदा EMI, क्रेडिट रिपोर्ट, नौकरी और अपनी शर्तें भी देखता है।
पात्रता का आसान मतलब: बैंक की जांच के अनुसार आप कितनी लोन राशि के योग्य हैं। कोई भी कैलकुलेटर इसका केवल अनुमान देता है; अंतिम रकम बैंक ही तय करता है। रकम का अनुमान लगाने से पहले आय, मौजूदा EMI, सिबिल और दस्तावेज की पर्सनल लोन पात्रता जाँच भी कर सकते है।
सैलरी से पर्सनल लोन राशि कैसे तय होती है?
बैंक आम तौर पर यह देखता है कि आपकी मासिक आय में से सभी चल रहे लोन की किस्तें भरने के बाद रोजमर्रा के खर्च के लिए पर्याप्त पैसा बचेगा या नहीं। इसका आसान क्रम यह है:
- हर महीने हाथ में आने वाली सैलरी देखी जाती है।
- पहले से चल रही सभी EMI जोड़ी जाती हैं।
- बैंक अपनी शर्तों के अनुसार नई EMI भरने की जगह देखता है।
- नई EMI, ब्याज दर और अवधि से अनुमानित लोन राशि निकाली जाती है।
किसी एक निश्चित EMI या सैलरी के गुणे का नियम सभी बैंकों पर लागू नहीं होता।
अपनी आय और मौजूदा किस्तों का असर समझने के लिए कर्ज-से-आय अनुपात कैलकुलेटर इस्तेमाल कर सकते हैं। कर्ज-से-आय अनुपात का मतलब है कि आपकी मासिक आय का कितना हिस्सा पहले से कर्ज की किस्तों में जा रहा है।
एक आसान उदाहरण से समझें
मान लें कि बैंक की जांच और आपके बजट के अनुसार नई EMI के लिए ₹10,000 की जगह बनती है। अगर उदाहरण के लिए ब्याज दर 12% सालाना और अवधि 5 वर्ष रखी जाए, तो अनुमानित लोन राशि लगभग ₹4.50 लाख बनती है।
यह केवल हिसाब समझाने का उदाहरण है। ब्याज दर, अवधि या बैंक की EMI राशि बदलते ही लोन रकम भी बदल जाएगी। अपना अलग अनुमान देखने के लिए पर्सनल लोन पात्रता कैलकुलेटर में सैलरी, मौजूदा EMI, ब्याज दर और अवधि भरें।
आवेदन में कौन-सी सैलरी लिखनी चाहिए?
आवेदन में सिर्फ वही आय लिखें जो मांगी गई हो और जिसे दस्तावेज से दिखाया जा सके।
- हाथ में आने वाली सैलरी: सभी कटौती के बाद बैंक खाते में आने वाली रकम।
- कुल सैलरी: कटौती से पहले सैलरी स्लिप में दिखाई गई रकम।
- बोनस, ओवरटाइम या दूसरी आय तभी जोड़ें, जब वह नियमित हो और बैंक उसे मानने के लिए तैयार हो।
अगर फॉर्म में “मासिक शुद्ध आय” लिखी हो, तो इसका मतलब आम तौर पर कटौती के बाद मिलने वाली आय है। गलत या बढ़ी हुई आय लिखने से दस्तावेज की जांच में आवेदन रुक सकता है।
लोन राशि किन 5 बातों से बदलती है?
1. हाथ में आने वाली नियमित सैलरी
सिर्फ बड़ी सैलरी नहीं, उसका नियमित होना और बैंक खाते में दिखाई देना भी जरूरी हो सकता है।
2. पहले से चल रही EMI
होम लोन, कार लोन, पर्सनल लोन और दूसरी मासिक किस्तें नए लोन की रकम को प्रभावित कर सकती हैं।
3. ब्याज दर और लोन अवधि
एक जैसी EMI में लंबी अवधि रखने पर लोन राशि बढ़ सकती है, लेकिन कुल ब्याज भी अधिक हो सकता है। इसीलिए केवल बड़ी रकम पाने के लिए बहुत लंबी अवधि न चुनें।
4. क्रेडिट रिपोर्ट
समय पर किए गए पुराने भुगतान, बकाया रकम और क्रेडिट रिपोर्ट की दूसरी जानकारी बैंक के फैसले पर असर डाल सकती है। लेकिन कोई एक निश्चित सिबिल स्कोर लोन की गारंटी नहीं देता।
5. बैंक की अपनी शर्तें
न्यूनतम आय, उम्र, नौकरी का प्रकार, काम करने की अवधि और रहने का स्थान जैसी शर्तें हर बैंक या लोन कंपनी में अलग हो सकती हैं।
₹25,000, ₹30,000 या ₹50,000 सैलरी पर कितना लोन मिलेगा?
इनमें से किसी भी सैलरी पर एक तय लोन रकम मिलना जरूरी नहीं है। उदाहरण के लिए, ₹50,000 सैलरी वाले व्यक्ति की पुरानी EMI ज्यादा है तो उसकी पात्रता ₹30,000 सैलरी वाले ऐसे व्यक्ति से भी कम हो सकती है जिस पर कोई EMI नहीं है। सही अनुमान के लिए सैलरी के साथ मौजूदा EMI, ब्याज दर और अवधि भी देखनी होगी।
अनुमान कम रकम का आए तो क्या करें?
- मांगी गई रकम को अपनी वास्तविक जरूरत तक सीमित रखें।
- मौजूदा EMI और क्रेडिट कार्ड की देनदारी सही-सही जोड़ें।
- अलग अवधि पर EMI और कुल ब्याज दोनों देखें।
- आवेदन से पहले बैंक की आय और नौकरी वाली शर्तें पढ़ें।
- बिना जांच किए एक ही समय में कई जगह पूरा आवेदन न करें।
यदि सही आय और दस्तावेज देने के बाद भी आवेदन रुक रहा है, तो पर्सनल लोन बार-बार रिजेक्ट होने के कारण अलग से देखें।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
क्या पहले से लोन चल रहा हो तो नया पर्सनल लोन मिल सकता है?
मिल सकता है, लेकिन बैंक पुरानी और नई सभी EMI को आपकी आय के साथ देखकर फैसला करेगा। मौजूदा EMI ज्यादा होने पर नई लोन राशि कम हो सकती है या आवेदन रुक सकता है।
क्या कैलकुलेटर में दिखाई गई रकम पक्की होती है?
नहीं। यह भरी गई जानकारी के आधार पर अनुमान होता है। अंतिम रकम दस्तावेज, क्रेडिट रिपोर्ट और बैंक की जांच के बाद तय होती है।
क्या ज्यादा अवधि चुनने से पात्रता बढ़ सकती है?
लंबी अवधि से EMI कम हो सकती है और अनुमानित पात्रता बदल सकती है। लेकिन इससे कुल ब्याज बढ़ सकता है, इसलिए EMI के साथ कुल भुगतान भी देखें।
पर्सनल लोन की सही रकम केवल सैलरी देखकर तय नहीं होती। पहले नई EMI भरने की अपनी क्षमता समझें, फिर ब्याज दर और अवधि के आधार पर अनुमान निकालें। बैंक जितनी रकम देने को तैयार हो, उतनी पूरी रकम लेना जरूरी नहीं है।
अस्वीकरण: यह लेख सामान्य जानकारी के लिए है। उदाहरण और कैलकुलेटर का परिणाम केवल अनुमान है, लोन मंजूरी का वादा नहीं। आवेदन से पहले संबंधित बैंक या लोन कंपनी की आय, दस्तावेज, ब्याज, शुल्क और दूसरी शर्तें जरूर पढ़ें।
