कई बार जिंदगी में समस्या लोन लेने के समय नहीं, बल्कि उसे चुकाते समय सामने आती है। जिस समय लोन लिया था, उस समय नौकरी ठीक चल रही थी, आमदनी नियमित थी और हर महीने की EMI आसानी से निकल जाती थी। लेकिन कुछ महीनों बाद हालात बदल जाते हैं। वेतन कम हो जाता है, नौकरी चली जाती है, कारोबार में बिक्री घट जाती है या परिवार में अचानक कोई बड़ा खर्च आ जाता है। दूसरी तरफ लोन की EMI पहले की तरह हर महीने खाते से कटती रहती है।

फिर यहीं से अक्सर परेशानी शुरू होती है।

आमदनी कम होने के बाद सबसे जरूरी बात यह है कि समस्या को छिपाने के बजाय समय रहते अपनी पूरी स्थिति समझी जाए। गैर-जरूरी खर्च कुछ समय के लिए रोके जा सकते हैं, बैंक से EMI कम करने या लोन की अवधि बढ़ाने की बात की जा सकती है, दूसरे लोन को कम लागत वाले विकल्प से बदलने पर विचार किया जा सकता है और जरूरत पड़ने पर अतिरिक्त आमदनी का रास्ता भी देखा जा सकता है। लेकिन सबसे बड़ी गलती यह होती है कि पुरानी EMI भरने के लिए नया महंगा लोन या किसी व्यक्ति से बहुत ऊंचे ब्याज पर पैसा ले लिया जाए। इससे एक महीने की समस्या कई महीनों के कर्ज में बदल जाती है।

इस पोस्ट में हम इसी पूरी स्थिति को समझेंगे—आमदनी कम होने के वास्तविक कारणों से लेकर EMI कम करने के तरीके, बैंक से बात करने का तरीका, बचत का इस्तेमाल, एक से ज्यादा लोन होने पर क्या करें और किन गलतियों से बचना जरूरी है।

📌 सामग्री (Table of Contents)

पहले समझिए कि EMI अचानक भारी क्यों लगने लगती है?

किसी भी लोन की EMI अपने आप नहीं बढ़ी होती, लेकिन आपकी आमदनी या खर्च की स्थिति बदल जाती है। यही कारण है कि जो EMI कुछ महीने पहले आसानी से भरी जा रही थी, वही अब बहुत बड़ी लगने लगती है।

मान लीजिए आपकी मासिक आय ₹50,000 थी। और लोन की EMI ₹15,000 थी और घर का सामान्य खर्च ₹25,000 था। इसके बाद भी आपके पास लगभग ₹10,000 बच जाते थे।

अब किसी कारण से आपकी आय घटकर ₹38,000 रह गई।

लेकिन EMI अभी भी ₹15,000 है। घर का खर्च भी पूरी तरह खत्म नहीं किया जा सकता। राशन चाहिए, बिजली का बिल देना है, बच्चों की फीस है, आने-जाने का खर्च है और दूसरी जरूरी जरूरतें भी हैं।

यानी समस्या केवल EMI की नहीं है। समस्या यह है कि आमदनी कम हो गई लेकिन पुराने खर्च और EMI उसी जगह खड़े हैं।

आमदनी कम होने के पीछे कौन-कौन से कारण होते हैं?

आमदनी कम होने का मतलब हमेशा नौकरी जाना नहीं होता। बहुत से लोगों को ऐसी स्थिति का सामना दूसरे कारणों से भी करना पड़ता है।

नौकरीपेशा लोगों के साथ

  • नौकरी चली जाना
  • वेतन कम हो जाना
  • कंपनी में काम या घंटे कम हो जाना
  • बोनस या अतिरिक्त भुगतान बंद हो जाना
  • नौकरी बदलने पर पहले से कम वेतन मिलना
  • कुछ समय के लिए बिना वेतन छुट्टी
  • नई नौकरी मिलने में एक-दो महीने लग जाना

कारोबार करने वालों के साथ

  • बिक्री कम होना
  • ग्राहक का भुगतान समय पर न मिलना
  • कारोबार में घाटा
  • दुकान या कार्यालय का खर्च बढ़ना
  • कारोबार में पैसा फंस जाना
  • किसी बड़े ग्राहक का भुगतान अटक जाना

परिवार में अचानक आने वाली परेशानी

कई बार व्यक्ति की अपनी आय ठीक रहती है, लेकिन परिवार का खर्च अचानक बढ़ जाता है।

इलाज का खर्च, बच्चों की फीस, घर का किराया बढ़ना, परिवार के किसी सदस्य की आय बंद होना या कोई दूसरी जरूरी जिम्मेदारी बजट बिगाड़ देती है।

इसलिए सबसे पहले यह पता करना जरूरी है कि आपकी समस्या अस्थायी है या लंबे समय तक चलने वाली है।

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सबसे पहले यह देखें कि आपकी समस्या कितनी बड़ी है

अपनी स्थिति को तीन हिस्सों में समझना आसान रहेगा।

पहली स्थिति: EMI भर पा रहे हैं, लेकिन महीने के अंत में पैसा नहीं बचता

इस स्थिति में समस्या अभी संभाली जा सकती है।

ऐसे मे कुछ समय के लिए गैर-जरूरी खर्च रोककर, बजट बदलकर और अतिरिक्त आमदनी बढ़ाकर स्थिति को ठीक किया जा सकता है।

दूसरी स्थिति: EMI भरने के लिए हर महीने उधार लेना पड़ रहा है

यह गंभीर स्तिथि का संकेत है।

अगर आपको एक लोन की EMI भरने के लिए क्रेडिट कार्ड इस्तेमाल करना पड़ रहा है या किसी दोस्त, रिश्तेदार या दूसरे व्यक्ति से पैसा लेना पड़ रहा है, तो केवल इस महीने की EMI भरना समाधान नहीं है।

यहाँ आपको पूरे कर्ज की तस्वीर को गौर से देखना होगा।

तीसरी स्थिति: अगली EMI भरना ही मुश्किल है

ऐसी स्थिति में EMI की तारीख आने तक चुपचाप इंतजार करना बिल्कुल भी सही कदम नहीं है।

समय रहते बैंक या लोन देने वाली संस्था से बात करना ज्यादा बेहतर है।

आप अपनी स्थिति के अनुसार EMI कम करने, लोन की अवधि बढ़ाने या उपलब्ध दूसरे विकल्पों के बारे में पूछ सकते हैं।

खर्च कम करें, लेकिन हर खर्च को एक जैसा न समझें

जब आमदनी कम होती है तो बहुत से लोग कहते हैं कि खर्च कम कर दो। यह बात भी कुछ हद तक सही है, लेकिन यह जानना भी जरूरी है कि कौन सा खर्च कम किया जा सकता है और कौन सा नहीं।

खर्चक्या किया जा सकता है
राशनजरूरी सामान रखें, गैर-जरूरी खरीदारी रोकें
बिजली-पानीफिजूलखर्ची कम करें
बच्चों की जरूरी फीसप्राथमिकता दें
दवा और इलाजजरूरत के खर्च को न रोकें
किरायास्थिति के अनुसार कम खर्च वाले विकल्प देखें
बाहर खानाकुछ समय के लिए रोकें
ऑनलाइन खरीदारीरोक दें
मनोरंजन की सदस्यताअस्थायी रूप से बंद करें
महंगी यात्राकुछ समय टालें
नया मोबाइल या इलेक्ट्रॉनिक सामानटालें

लक्ष्य यह नहीं होना चाहिए कि घर का हर खर्च बंद कर दिया जाए। लक्ष्य यह होना चाहिए कि कुछ महीनों के लिए पैसे का इस्तेमाल केवल उन जगहों पर हो जहां वास्तव में जरूरत है।

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EMI कम करने के लिए लोन की अवधि बढ़ाने का विकल्प देखें

अगर आपकी EMI बहुत ज्यादा है तो बैंक से पूछें कि लोन की बची हुई अवधि बढ़ाकर EMI कम की जा सकती है या नहीं।

उदाहरण के लिए, अगर किसी व्यक्ति की EMI ₹18,000 है और अवधि बढ़ाने के बाद EMI ₹14,000 के आसपास आती है, तो हर महीने ₹4,000 की राहत मिल सकती है।

लेकिन यहां एक बात आपके लिए समझना बहुत जरूरी है।

EMI कम होने का मतलब यह नहीं है कि लोन सस्ता हो गया।

लोन की अवधि बढ़ने पर ब्याज ज्यादा समय तक देना पड़ सकता है और कुल ब्याज बढ़ सकता है।

इसलिए यह विकल्प उस व्यक्ति के लिए उपयोगी हो सकता है जिसे फिलहाल हर महीने की EMI संभालने में परेशानी हो रही है और वह अपने बजट को कुछ राहत देना चाहता है।

इसकी सही तुलना करने के लिए Fincoloan का Loan Restructure Calculator (लोन रि-स्ट्रक्चर कैलकुलेटर) इस्तेमाल किया जा सकता है।

बैंक से बात करने में देर न करें

कई लोग बैंक का फोन आने के बाद परेशान हो जाते हैं और फोन उठाना बंद कर देते हैं। इससे आपकी वास्तविक समस्या हल नहीं होती है 

अगर आपको पहले से पता है कि आने वाली EMI भरना मुश्किल होगा तो बैंक से बात करके उपलब्ध विकल्प पूछना बेहतर है।

आप सीधे ये सवाल पूछ सकते हैं:

  1. क्या EMI कम करने का कोई विकल्प है?
  2. क्या लोन की अवधि बढ़ाई जा सकती है?
  3. क्या EMI की तारीख बदलने की सुविधा है?
  4. क्या ब्याज दर कम करने का कोई विकल्प उपलब्ध है?
  5. क्या लोन को किसी दूसरी योजना में बदला जा सकता है?
  6. क्या लोन बैलेंस ट्रांसफर करने पर फायदा होगा?
  7. इसके लिए कितना शुल्क लगेगा?

यहां सबसे जरूरी बात है कि अपनी वास्तविक स्थिति बताएं। केवल यह कहने से कि “पैसे की थोड़ी परेशानी है” बात पूरी नहीं होगी। अगर आय वास्तव में कम हुई है तो उसे स्पष्ट रूप से बताना बेहतर है।

EMI की तारीख भी कभी-कभी परेशानी का कारण होती है

मान लीजिए आपकी सैलरी हर महीने 7 तारीख को आती है लेकिन EMI 2 तारीख को खाते से कटती है।

आपके पास पूरे महीने का पैसा आने वाला है, लेकिन EMI की तारीख पहले आ गई।

ऐसी स्थिति में बैंक से पूछ सकते हैं कि EMI की तारीख बदलने की सुविधा उपलब्ध है या नहीं।

इससे EMI की राशि कम नहीं होगी, लेकिन खाते में पर्याप्त पैसा न होने के कारण होने वाली परेशानी कम हो सकती है।

यह छोटी बात लगती है, लेकिन महीने के बजट में इसका काफी फर्क पड़ सकता है।

लोन बैलेंस ट्रांसफर से EMI का बोझ कम हो सकता है

अगर आपके पुराने लोन की ब्याज दर ज्यादा है और आपको किसी दूसरी बैंक या संस्था से कम ब्याज पर लोन ट्रांसफर का विकल्प मिल रहा है तो इसका फैसला लेने से पहले इसकी तुलना की जा सकती है।

लेकिन केवल यह देखकर फैसला न लें कि नई EMI कम है।

इन चीजों को साथ में देखें:

  • नई ब्याज दर
  • बची हुई लोन राशि
  • बची हुई अवधि
  • प्रोसेसिंग शुल्क
  • पुराने लोन को बंद करने का खर्च
  • नए लोन की दूसरी शर्तें
  • पूरे लोन में कितना ब्याज देना पड़ेगा

कई बार कम EMI केवल इसलिए दिखाई देती है क्योंकि लोन की अवधि ज्यादा कर दी जाती है।

इसलिए फैसला लेने से पहले Loan Balance Transfer Calculator से पूरी लागत की तुलना करना बेहतर रहेगा।

EMI भरने के लिए किसी व्यक्ति से ब्याज पर पैसा लेना बहुत महंगा पड़ सकता है

यह ऐसी वास्तविक स्थिति है जिसके बारे में अक्सर खुलकर बात नहीं होती है 

जब बैंक की EMI सामने होती है और खाते में पैसा नहीं होता, तो कुछ लोग किसी परिचित, स्थानीय व्यक्ति या दूसरे व्यक्ति से तुरंत पैसा उधार ले लेते हैं।

कई मामलों में इस तरह के पैसे पर हर महीने 3%, 5%, 7% और कभी-कभी 10% तक ब्याज मांग लिया जाता है। यह कोई सामान्य या उचित दर नहीं है, बल्कि कुछ लोगों द्वारा ऐसी परिस्थितियों में लिए गए बेहद महंगे निजी कर्ज का उदाहरण है।

मान लीजिए किसी ने ₹50,000 लिए और ब्याज 5% महीना है।

सिर्फ एक महीने का ब्याज ₹2,500 बैठता है।

अगर पैसा लंबे समय तक वापस नहीं किया गया तो ब्याज का बोझ लगातार बढ़ता रहेगा।

सबसे बड़ी समस्या यह है कि व्यक्ति ने पुरानी EMI भरने के लिए पैसा लिया था, लेकिन अब उसके ऊपर पुरानी EMI के साथ नया महंगा कर्ज भी आ गया।

यानी समस्या खत्म नहीं हुई, बल्कि एक नया बोझ जुड़ गया।

इसलिए किसी व्यक्ति से ब्याज पर पैसा लेकर EMI भरने से पहले पूरी गणना जरूर करें। खासकर ऐसी मासिक ब्याज दर पर जो पहली नजर में छोटी लगती है लेकिन साल भर में बहुत बड़ी लागत बन जाती है।

₹50,000 की जरूरत के लिए ₹50,000 ही उधार लेना और ₹50,000 के बदले लगातार ब्याज देना—इन दोनों को अलग-अलग समझना बेहद जरूरी है।

सिर्फ यह सोचकर पैसा न लें कि “अभी EMI बच जाएगी, बाद में देखेंगे।”

कई परिवारों के लिए यही “बाद में देखेंगे” वाली सोच कर्ज का बड़ा जाल बना देती है।

इसे भी पढ़ें: क्रेडिट कार्ड से ATM से कैश निकालना चाहिए या नहीं? जानें कितना चार्ज लगता है और क्या नुकसान है

EMI भरने के लिए ऐप से नया लोन लेना

अगर ₹15,000 की EMI भरने के लिए ₹20,000 का नया लोन ले लिया और अगले महीने पुराने लोन की EMI के साथ नए लोन का भुगतान भी आ गया, तो स्थिति और भी ज्यादा मुश्किल हो सकती है।

इसी तरह लगातार क्रेडिट कार्ड से खर्च करके EMI भरने की कोशिश करना भी समस्या को आगे खिसकाता है।

एक कर्ज चुकाने के लिए दूसरा महंगा कर्ज लेना तभी समझ में आता है जब पूरी लागत, भुगतान की क्षमता और वापसी की योजना साफ और आपके बजट मे हो।

सिर्फ आज की EMI बचाने के लिए कल का बोझ बढ़ाना समझदारी नहीं है।

बचत है तो क्या पूरी बचत से लोन चुका देना चाहिए?

यह सवाल भी बहुत लोगों के सामने आता है।

मान लीजिए आपके पास ₹1 लाख की बचत है और लोन की कुछ बकाया राशि भी है। क्या पूरी बचत लोन में डाल देनी चाहिए?

हर बार जवाब हां नहीं है।

पहले यह देखें:

  • नौकरी या कारोबार की स्थिति कैसी है?
  • अगले कुछ महीनों का घर का खर्च कैसे चलेगा?
  • इलाज या किसी जरूरी खर्च की संभावना है?
  • आपके पास आपातकाल के लिए कितना पैसा बचेगा?
  • लोन की ब्याज लागत कितनी है?

पूरी बचत लोन का भुगतान करने में डालकर अगर अगले महीने घर का खर्च चलाने के लिए फिर से नया कर्ज लेना पड़े तो फायदा कम हो सकता है।

अगर आपकी स्थिति ठीक है और पर्याप्त आपातकालीन पैसा अलग रखा हुआ है, तब अतिरिक्त रकम से लोन का कुछ हिस्सा पहले चुकाने पर विचार किया जा सकता है।

इसके आपको कितना फायदा होगा यह समझने के लिए Loan Prepayment Calculator का इस्तेमाल के सकते है।

अगर एक से ज्यादा EMI चल रही हैं तो पूरी तस्वीर सामने रखें

मान लीजिए आपकी स्थिति कुछ ऐसी है:

कर्जमासिक EMI
पर्सनल लोन₹12,000
बाइक लोन₹4,000
क्रेडिट कार्ड की किस्त₹5,000
दूसरा छोटा लोन₹3,000
कुल₹24,000

अब केवल ₹24,000 देखकर घबराने के बजाय हर कर्ज की लागत देखें।

किस पर ब्याज ज्यादा है? किसकी अवधि कितनी बची है? किसे जल्दी खत्म करने से राहत मिलेगी? क्या किसी लोन को कम लागत वाले विकल्प में बदला जा सकता है?

ऐसी स्थिति में सभी कर्ज की सूची बनाना पहला काम होना चाहिए।

आमदनी बढ़ाने की कोशिश करें, लेकिन हवा में नहीं

आमदनी कम होने पर “साइड बिजनेस शुरू करें” या “ऑनलाइन पैसा कमाएं” कहना आसान है। असली जिंदगी में हर व्यक्ति के लिए यह इतना आसान नहीं होता है।

इसलिए वही रास्ते देखें जिन्हें आप वास्तव में कर सकते हैं।

नौकरी करने वाला व्यक्ति अपने काम से जुड़ा अतिरिक्त काम, सप्ताह के अंत मे अन्य काम, अपनी जानकारी या कौशल से छोटा अतिरिक्त काम या घर में पड़ी ऐसी चीजें बेचने पर विचार किया जा सकता है जिनकी वास्तव मे कोई जरूरत नहीं है।

छोटे कारोबार वाले व्यक्ति के लिए पुराने बकाये की वसूली, धीमी बिक्री वाले सामान में पैसा फंसाने से बचना और गैर-जरूरी कारोबार खर्च कम करना ज्यादा व्यावहारिक हो सकता है।

आपका लक्ष्य यह नहीं होना चाहिए कि अचानक बहुत ज्यादा पैसा कमाया जाए।

अगर हर महीने ₹3,000-₹5,000 अतिरिक्त आना शुरू हो जाए तो वह भी EMI के दबाव में काफी राहत दे सकता है।

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अगर अगले महीने EMI भरना मुश्किल है तो यह छोटा सा प्लान बनाएं

पहले दिन

  • सभी लोन की सूची बनाएं
  • हर EMI लिखें
  • खाते में मौजूद पैसा देखें
  • अगले 30 दिनों के जरूरी खर्च लिखें

अगले 2-3 दिन

  • गैर-जरूरी खर्च रोकें
  • बैंक या लोन देने वाली संस्था से संपर्क करें
  • EMI कम करने या अवधि बढ़ाने के विकल्प पूछें
  • अतिरिक्त आमदनी के तुरंत उपलब्ध रास्ते देखें

अगले 7 दिन

  • सभी कर्ज की ब्याज दर और बची राशि देखें
  • बैलेंस ट्रांसफर की तुलना करें
  • जरूरत होने पर प्री-पेमेंट की गणना करें
  • नए महंगे कर्ज से बचने की योजना बनाएं

इस तरह समस्या को एक साथ देखने के बजाय छोटे हिस्सों में संभालना आसान हो जाता है।

इन गलतियों से बचना सबसे जरूरी है

आमदनी कम होने पर घबराहट में लोग कुछ ऐसी गलतियां कर देते हैं जो बाद में समस्या को और बड़ा बना देती हैं।

1. EMI भरने के लिए बार-बार नया लोन लेना

एक EMI बचती है लेकिन दूसरी EMI जुड़ जाती है।

2. बहुत ऊंची मासिक ब्याज दर पर निजी कर्ज लेना

3%, 5%, 7% या उससे ज्यादा मासिक ब्याज सुनने में छोटा लग सकता है, लेकिन रकम और समय बढ़ने पर बोझ बहुत बड़ा हो सकता है।

3. बैंक के फोन से बचना

फोन न उठाने से बकाया खत्म नहीं होता।

4. क्रेडिट कार्ड से लगातार घर चलाना

आज की कमी को क्रेडिट कार्ड से भरना अगले महीने का खर्च बढ़ा सकता है।

5. पूरी बचत लोन में डाल देना

अगर उसके बाद जरूरी खर्च के लिए पैसा नहीं बचता तो फिर से कर्ज लेना पड़ सकता है।

6. केवल कम EMI देखकर नया लोन लेना

कम EMI का मतलब हमेशा कम कुल लागत नहीं होता।

7. समस्या परिवार से छिपाना

अगर घर में दो लोग कमाते हैं तो आर्थिक समस्या को मिलकर समझना और कुछ महीनों की प्राथमिकताएं तय करना ज्यादा व्यावहारिक हो सकता है।

लोन का बोझ कम करने के लिए सबसे पहले क्या करें?

अगर पूरी बात को बहुत सरल तरीके से समझें तो आपको एक साथ दस काम करने की जरूरत नहीं है।

सबसे पहले अपनी मासिक आय और सभी खर्च लिखें।

फिर सभी लोन की EMI, ब्याज दर और बची हुई राशि लिखें।

इसके बाद गैर-जरूरी खर्च रोकें और यह देखें कि हर महीने वास्तविक रूप से कितनी रकम बचाई जा सकती है।

अगर EMI फिर भी बहुत ज्यादा है तो बैंक से बात करें।

लोन की अवधि बढ़ाने, EMI कम करने या बैलेंस ट्रांसफर जैसे विकल्पों की लागत की तुलना करें।

अगर अतिरिक्त आमदनी का कोई वास्तविक रास्ता है तो उसे शुरू करें।

और सबसे जरूरी—पुरानी EMI भरने के लिए बिना सोचे-समझे नया महंगा कर्ज बिल्कुल न लें।

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आखिरी बात: EMI की समस्या को छिपाने से वह छोटी नहीं होती

आमदनी कम होना किसी के लिए भी परेशानी की बात है। नौकरी जाने, वेतन घटने या कारोबार में नुकसान होने की स्थिति में पहले से चल रही EMI अचानक बहुत भारी लग सकती है।

ऐसे समय में घबराकर कोई भी रास्ता पकड़ लेना सबसे बड़ी गलती हो सकती है।

किसी व्यक्ति से बहुत ऊंचे मासिक ब्याज पर पैसा लेकर EMI भरना, एक ऐप लोन से दूसरा लोन चुकाना या क्रेडिट कार्ड से लगातार खर्च करना कुछ समय के लिए राहत दे सकता है, लेकिन इससे कर्ज का बोझ और बढ़ सकता है।

इसके बजाय अपनी वास्तविक स्थिति सामने रखें। खर्चों को जरूरी और गैर-जरूरी हिस्सों में बांटें, बैंक से समय रहते बात करें, EMI और लोन की अवधि के विकल्प समझें, जरूरत पड़ने पर बैलेंस ट्रांसफर की तुलना करें और अपनी क्षमता के अनुसार अतिरिक्त आमदनी बढ़ाने की कोशिश करें।

लोन का बोझ कम करने का पहला कदम ज्यादा पैसा कमाना नहीं, बल्कि यह समझना है कि पैसा कहां जा रहा है और किस कर्ज की लागत सबसे ज्यादा है।

जब यह तस्वीर साफ हो जाती है तो आगे का फैसला भी ज्यादा समझदारी से लिया जा सकता है।

इस विषय पर अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

आमदनी कम हो गई है तो EMI कैसे कम करें?

बैंक से लोन की अवधि बढ़ाने, EMI में बदलाव और उपलब्ध दूसरे विकल्पों के बारे में पूछें। साथ ही अपने खर्च और दूसरे कर्ज की भी समीक्षा करें।

क्या लोन की अवधि बढ़ाने से EMI कम हो जाती है?

हां, कई मामलों में अवधि बढ़ाने से मासिक EMI कम हो सकती है। लेकिन कुल अवधि बढ़ने से कुल ब्याज बढ़ सकता है।

क्या EMI भरने के लिए दूसरा लोन लेना चाहिए?

सिर्फ पुरानी EMI भरने के लिए नया महंगा लोन लेना सही तरीका नहीं है। पहले दोनों कर्ज की कुल लागत और भुगतान क्षमता की तुलना करें।

क्या किसी व्यक्ति से ब्याज पर पैसा लेकर बैंक की EMI भर सकते हैं?

पैसा मिल सकता है, लेकिन अगर मासिक ब्याज बहुत ज्यादा है तो यह काफी महंगा पड़ सकता है। खासकर 3%, 5%, 7% या 10% जैसी मासिक दर पर पैसा लेने से पहले पूरी लागत जरूर समझें।

नौकरी जाने पर लोन की EMI कैसे संभालें?

सबसे पहले जरूरी खर्च और उपलब्ध बचत देखें। फिर लोन देने वाली संस्था से समय रहते संपर्क करें और उपलब्ध राहत या भुगतान विकल्पों के बारे में पूछें।

क्या पूरी बचत से लोन चुका देना चाहिए?

हर व्यक्ति के लिए नहीं। लोन चुकाने के बाद अगर घर के जरूरी खर्च और आपात स्थिति के लिए पैसा नहीं बचेगा तो फिर से कर्ज लेने की जरूरत पड़ सकती है।

क्या लोन बैलेंस ट्रांसफर से फायदा हो सकता है?

हां, अगर नया विकल्प कम कुल लागत देता है। केवल कम EMI देखकर फैसला न करें; ब्याज, शुल्क, बची अवधि और कुल भुगतान की तुलना करें।

एक से ज्यादा EMI चल रही हैं तो क्या करें?

सभी लोन की EMI, ब्याज दर, बकाया राशि और बची अवधि लिखें। इसके बाद सबसे महंगे कर्ज और संभावित कम लागत वाले विकल्पों की तुलना करें।

EMI भरने में परेशानी हो रही है तो बैंक से कब बात करें?

जब आपको पता चल जाए कि आने वाली EMI भरना मुश्किल होगा, तब ही बात करना बेहतर है। समस्या बढ़ने का इंतजार न करें।

हमारी ईबुक पढ़ें

EMI कम करना और कर्ज कम करना एक ही बात नहीं है।

EMI कम करने से हर महीने राहत मिल सकती है, लेकिन अगर इसके लिए लोन की अवधि बहुत बढ़ जाती है तो कुल ब्याज ज्यादा हो सकता है। इसलिए फैसला हमेशा अपनी मौजूदा आय, जरूरी खर्च, बचत और पूरे लोन की लागत देखकर ही करें।

वित्तीय जानकारी और बेहतर पैसों की समझ के लिए हमारी ईबुक “फाइनेंशियल फ्रीडम कैसे पाएं – नौकरी से निवेश तक का सफर” भी पढ़ सकते हैं।

अस्वीकरण: इस लेख में दिए गए उदाहरण समझाने के लिए हैं। लोन की ब्याज दर, शुल्क, EMI, अवधि, भुगतान विकल्प और अन्य शर्तें बैंक या लोन देने वाली संस्था के अनुसार अलग हो सकती हैं। किसी भी लोन से जुड़ा फैसला लेने से पहले संबंधित बैंक या वित्तीय संस्था की वर्तमान शर्तों को जरूर जांचें। अलग-अलग वित्तीय संस्थाओं से जुड़े विकल्पों की उपलब्धता आपकी व्यक्तिगत स्थिति पर निर्भर करती है।

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लोन लेने से पहले ऐसे जानें कि आप EMI समय पर चुका पाएंगे या नहीं