अच्छी सैलरी और CIBIL स्कोर भी अच्छा होने के बाद भी होम लोन रिजेक्ट हो सकता है, क्योंकि बैंक आवेदक के साथ उस घर की भी कानूनी और तकनीकी जांच करता है। कई बार ग्राहक लोन के योग्य होता है, लेकिन चुनी हुई प्रॉपर्टी नहीं।
पहले समझें: बैंक दो अलग जांच करता है
- आवेदक की जांच: आय, नौकरी या कारोबार, चल रही EMI, उम्र, CIBIL रिपोर्ट और भुगतान रिकॉर्ड।
- प्रॉपर्टी की जांच: मालिकाना हक, पुराने कागज, सरकारी मंजूरी, निर्माण और बैंक के अनुसार उसकी कीमत।
CIBIL के अनुसार अंतिम फैसला बैंक की अपनी नीति पर निर्भर करता है। इसलिए अच्छा सिबिल स्कोर भी मंजूरी की गारंटी नहीं है।
प्रॉपर्टी के कारण होम लोन रिजेक्ट होने के मुख्य कारण
| समस्या | बैंक को क्या चिंता होती है? | आपको क्या जांचना चाहिए? |
|---|---|---|
| मालिकाना हक साफ नहीं | घर बेचने वाले के अधिकार पर संदेह | बिक्री विलेख और पुराने मालिकों की कड़ी |
| पुराना लोन या कानूनी बोझ | बैंक साफ बंधक नहीं बना पाएगा | पुराने बैंक का बकाया और No Dues Certificate |
| नक्शा या मंजूरी अधूरी | निर्माण नियमों के अनुसार नहीं हो सकता | मंजूर नक्शा और जरूरी स्थानीय मंजूरी |
| बैंक की कीमत कम | मांगी गई लोन राशि प्रॉपर्टी के मूल्य से अधिक पड़ सकती है | बैंक की मूल्यांकन रिपोर्ट पर आपत्ति |
| कागजों में अंतर | असली मालिक या सही प्रॉपर्टी तय नहीं होती | नाम, पता, क्षेत्रफल और प्लॉट/फ्लैट नंबर |
1. मालिकाना हक साफ नहीं है
विरासत, कई हिस्सेदार, अधूरा बंटवारा या मुकदमा होने पर मालिकाना हक पर सवाल उठ सकता है। रीसेल घर में बैंक पुराने मालिकों से मौजूदा मालिक तक दस्तावेजों की पूरी कड़ी भी मांग सकता है।
2. प्रॉपर्टी पर पुराना लोन या दूसरा दावा है
अगर विक्रेता ने उसी प्रॉपर्टी पर लोन लिया था, तो उसका सही तरीके से बंद होना जरूरी है। इसलिए यदि आपने घर खरीदा है तो उससे No Dues Certificate, यानी कोई बकाया न होने का प्रमाण, और मूल कागजों की स्थिति पूछें।
3. जरूरी नक्शा या सरकारी मंजूरी नहीं है
अगर मकान पास हुए नक्शे के हिसाब से न बना हो, कोई अवैध मंजिल बनी हो या आवासीय जगह का इस्तेमाल दुकान की तरह हो रहा हो, तो बैंक की जांच टीम आपत्ति लगा सकती है और लोन अटक सकता है। जरूरी कागजात प्रॉपर्टी के प्रकार और उसके इलाके के हिसाब से अलग-अलग हो सकते हैं।
4. बैंक का मूल्यांकन सौदे की कीमत से कम है
बैंक अपने विशेषज्ञ से प्रॉपर्टी की कीमत तय कराता है। इसे मूल्यांकन या valuation कहते हैं। मूल्य सौदे की कीमत से कम निकलने पर बैंक लोन राशि घटा सकता है। बड़ा अंतर होने पर आवेदन रुक या रिजेक्ट भी हो सकता है।
5. प्रॉपर्टी बहुत पुरानी, अधूरी या बैंक की नीति से बाहर है
बैंक मकान की उम्र, उसकी मौजूदा हालत, वहां तक जाने का रास्ता और इलाके की लोकेशन भी देखता है।
अगर कोई प्रोजेक्ट (सोसायटी या फ्लैट) बैंक की पहले से मंजूर लिस्ट में शामिल नहीं है, तो भी लोन मिलने में दिक्कत आ सकती है। हालांकि, इसका मतलब यह कतई नहीं कि प्रोजेक्ट अवैध या गलत है; ऐसी स्थिति में बैंक से ही सही कारण की जानकारी लें।
दस्तावेज की कौन-सी गलतियां आवेदन रोक सकती हैं?
प्रॉपर्टी सही होने पर भी नीचे की गड़बड़ियां परेशानी पैदा कर सकती हैं:
- आवेदन, PAN, पहचान पत्र और बैंक खाते में नाम या जन्मतिथि अलग होना।
- बिक्री समझौते, बिक्री विलेख और सरकारी रिकॉर्ड में क्षेत्रफल या फ्लैट नंबर अलग होना।
- सैलरी स्लिप, Form 16 और बैंक में जमा सैलरी का मेल न होना।
- सह-आवेदक का नाम लोन में होना, लेकिन मालिकाना कागजों में स्थिति साफ न होना।
- विक्रेता, बिल्डर या पुराने मालिक से जुड़े जरूरी कागज न मिलना।
- कागज कटे, अस्पष्ट, बदले हुए या पढ़ने योग्य न होना।
- अपनी तरफ से दी जाने वाली रकम का साफ प्रमाण न होना।
गलती छिपाने के बजाय उसे सही प्रमाण से ठीक करें। नकली या बदला हुआ कागज कभी जमा न करें।
प्री-अप्रूव्ड होम लोन के बाद भी आवेदन क्यों रुक सकता है?
प्री-अप्रूवल आम तौर पर आपकी आय और क्रेडिट प्रोफाइल के शुरुआती आकलन पर मिलता है। इसका अर्थ यह नहीं कि चुना गया घर भी मंजूर है। रकम जारी करने से पहले प्रॉपर्टी जांच में कमी मिलने पर प्री-अप्रूव्ड होम लोन भी रुक सकता है।
रिजेक्शन के बाद क्या करें?
1. सही कारण लिखित में मांगें
बैंक को ईमेल या पत्र लिखकर साफ पूछें कि लोन अटकने की वजह क्या है—आपकी योग्यता, कानूनी जांच (लीगल), तकनीकी जांच (टेक्निकल), मकान की कीमत का आकलन (वैल्यूएशन) या फिर अधूरे कागजात? अगर बैंक अपनी पूरी अंदरूनी रिपोर्ट न भी दे, तो भी मुख्य आपत्ति की जानकारी जरूर मांगें।
2. गायब या गलत कागजों की सूची लें
बैंक से ठीक सूची लें। नाम या पता अलग है तो उचित प्रमाण दें। पुराना लोन बंद है तो उसका प्रमाण जुटाएं।
3. प्रॉपर्टी की स्वतंत्र कानूनी जांच कराएं
मालिकाना हक, विरासत, विवाद या पुराने बंधक का मामला हो तो स्वतंत्र प्रॉपर्टी वकील से कागज जांचवाएं। केवल विक्रेता या एजेंट की बात पर निर्भर न रहें।
4. वही आवेदन तुरंत कई बैंकों में न भेजें
कागज या प्रॉपर्टी की कमी बैंक बदलने से खत्म नहीं होगी। पहले आपत्ति ठीक करें। केवल बैंक की अंदरूनी नीति से मामला रुका हो, तभी दूसरे बैंक से बात करना उपयोगी हो सकता है।
5. बड़ी अग्रिम रकम देने से पहले शर्त पढ़ें
प्रॉपर्टी जांच पूरी होने से पहले बड़ी, वापस न मिलने वाली अग्रिम रकम (Non Refundable Amount) देना जोखिम भरा हो सकता है। बिक्री समझौते में लोन न मिलने से जुड़ी शर्त समझकर ही हस्ताक्षर करें।
दोबारा आवेदन से पहले छोटी जांच सूची
- क्या विक्रेता के मालिकाना कागजों की पूरी कड़ी उपलब्ध है?
- क्या पुराने लोन या दूसरे दावे की स्थिति साफ है?
- क्या लागू भवन मंजूरी और मंजूर नक्शा मौजूद है?
- क्या सभी कागजों में नाम, पता, क्षेत्रफल और प्रॉपर्टी नंबर एक जैसे हैं?
- क्या बैंक ने कम मूल्यांकन किया है? यदि हां, तो मांगी गई राशि फिर से तय की है?
- क्या बैंक की बताई आपत्ति वास्तव में ठीक हो चुकी है?
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
क्या बैंक की मंजूर प्रोजेक्ट (सोसायटी या फ्लैट) में घर लेने पर लोन पक्का है?
नहीं। बैंक आपकी आय, कागज और उस खास घर की स्थिति भी देखेगा।
क्या अच्छे CIBIL स्कोर के बावजूद होम लोन रिजेक्ट हो सकता है?
हां। CIBIL आपकी उधारी और भुगतान का रिकॉर्ड दिखाता है। प्रॉपर्टी का मालिकाना हक, मंजूरी, निर्माण और कीमत अलग जांच का हिस्सा हैं।
क्या दूसरे बैंक में आवेदन करने से लोन मिल जाएगा?
दूसरा बैंक मामला देख सकता है, लेकिन कानूनी विवाद, अधूरा मालिकाना रिकॉर्ड या जरूरी मंजूरी की कमी पहले ठीक करनी होगी।
निष्कर्ष
सैलरी और CIBIL ठीक होने पर होम लोन का एक हिस्सा मजबूत होता है, पूरा मामला नहीं। रिजेक्शन के बाद सबसे पहले यह जानें कि कमी आवेदक में है या प्रॉपर्टी में। प्रॉपर्टी की कानूनी और तकनीकी आपत्ति ठीक किए बिना बार-बार आवेदन करना सही समाधान नहीं है।
अस्वीकरण: यह सामान्य जानकारी है। प्रॉपर्टी के नियम और जरूरी कागज राज्य, स्थानीय निकाय, प्रॉपर्टी के प्रकार और बैंक की नीति के अनुसार बदल सकते हैं। किसी खास सौदे से पहले बैंक और योग्य प्रॉपर्टी वकील से जांच कराएं।
जानकारी के स्रोत: HDFC Bank की होम लोन दस्तावेज सूची और CIBIL के लोन रिजेक्शन संबंधी सवाल
