लोन की कुल लागत कम करने के लिए प्रीपेमेंट, अवधि और बैलेंस ट्रांसफर जैसे कई विकल्प होते हैं। जानिए सही तरीका कैसे चुनें।
कोई भी फैसला लेने से पहले अपने बैंक स्टेटमेंट से बकाया मूलधन, बची हुई अवधि और मौजूदा ब्याज दर जरूर जांच लें।
अतिरिक्त बचत से मूलधन का कुछ हिस्सा चुकाने पर बकाया राशि घटती है, जिससे आगे लगने वाला कुल ब्याज कम हो जाता है।
मासिक बजट अनुमति दे तो EMI बढ़वाएं। इससे मूलधन तेजी से खत्म होता है और लोन तय समय से पहले चुकता हो जाता है।
अपने मौजूदा बैंक से ब्याज दर घटाने का अनुरोध करें या बाजार की दरों के आधार पर लोन की शर्तों की समीक्षा करवाएं।
दूसरे बैंक में लोन ट्रांसफर करने से पहले प्रोसेसिंग फीस और अन्य चार्ज जोड़कर देखें कि कुल बचत वाकई हो रही है या नहीं।
सिर्फ कम EMI देखकर फैसला न लें और ट्रांसफर के समय अवधि बेवजह न बढ़ाएं, वरना कुल ब्याज का बोझ बढ़ सकता है।
अतिरिक्त फंड होने पर प्रीपेमेंट और नियमित बचत पर EMI बढ़ाना बेहतर है। हमेशा कुल बाकी भुगतान पर पड़ने वाला असर देखें।
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यह सामग्री केवल सामान्य जानकारी के लिए है। किसी भी वित्तीय निर्णय से पहले विशेषज्ञ से सलाह लें।
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