होम लोन लेते समय ब्याज दर का प्रकार चुनना जरूरी है। जानिए फिक्स्ड रेट कैसे काम करता है और इसके क्या फायदे हैं।
इसमें तय समय तक ब्याज दर नहीं बदलती। बाजार में दरें बढ़ने या घटने पर भी आपकी तय अवधि तक EMI स्थिर रहती है।
फ्लोटिंग रेट बाजार के आधार पर घटती-बढ़ती रहती है। इससे आपकी मासिक EMI या लोन की कुल अवधि में बदलाव हो सकता है।
तय अवधि में दर स्थिर रहने से बजट बनाना आसान होता है। साथ ही बाजार में अचानक दरें बढ़ने पर भी सुरक्षा मिलती है।
बाजार में दरें घटने पर आपको अपने आप फायदा नहीं मिलता। इसके अलावा कई लोन में फिक्स्ड अवधि केवल कुछ वर्षों तक ही सीमित होती है।
यदि आप बिना बदलाव वाली स्थिर EMI चाहते हैं तो फिक्स्ड चुनें। दर घटने का लाभ उठाने के लिए फ्लोटिंग पर विचार कर सकते हैं।
लोन लेने से पहले देखें कि फिक्स्ड दर कितने वर्षों के लिए है और वह अवधि खत्म होने के बाद लोन किस दर पर चलेगा।
दोनों विकल्पों की EMI और कुल लागत की तुलना करें। अपनी वित्तीय क्षमता और लोन की शर्तों को देखकर ही सही फैसला लें।
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यह सामग्री केवल सामान्य जानकारी के लिए है। किसी भी वित्तीय निर्णय से पहले विशेषज्ञ से सलाह लें।
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